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तमिलनाडु: वन खरपतवार को ईंधन में बदल आदिवासी बनाएंगे आय

Posted on January 6, 2023 - 4:02 pm by

इरोड जिला प्रशासन ने सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली एक आक्रामक प्रजाति खरपतवार लैंटाना कैमरा है. जिसको ईंधन में बदलने और हसनूर में आदिवासी लोगों के लिए एक नियमित आय सुनिश्चित करने के लिए एक परियोजना शुरू की है.

तमिलनाडु वझंधु कट्टुवोम प्रोजेक्ट (TNVKP) के तहत हसनूर के तलवाड़ी आदिवासी मुनेत्र संगम में 50 से अधिक आदिवासी लोगों को लैंटाना से फर्नीचर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. बाद में  हसनूर ट्राइबल लैंटाना कैमारा एंटरप्राइज ग्रुप का गठन किया गया. तैयार उत्पादों का विपणन अब ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED) के साथ-साथ इरोड में स्व-सहायता समूहों के लिए एक विशेष रिटेल आउटलेट आत्रल इरोड में किया जा रहा है.

भट्टियों और बॉयलरों में होता है ईंधन ब्रिकेट का उपयोग

अधिक आदिवासी लोगों को रोजगार के साथ-साथ आय का एक नियमित स्रोत प्रदान करने के लिए, जिला कलेक्टर एच. कृष्णानुन्नी ने लैंटाना को ब्रिकेट में बदलने के लिए एक परियोजना शुरू की, जिसे उद्योगों में भट्टियों और बॉयलरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. चूंकि लैंटाना में ईंधन दक्षता उच्च कैलोरी मान के कारण उच्च है. इसलिए लैंटाना से बने ईंधन ब्रिकेट उद्योगों द्वारा पसंद किए जाते हैं.

टीएनवीकेपी के इनोवेशन फंड के तहत, ट्रेलर, ब्रश कटर और चिपर वाला एक ट्रैक्टर ₹16 लाख की लागत से खरीदा गया और टीएनवीकेपी के जिला कार्यकारी अधिकारी जी धमोदरन की उपस्थिति में कृष्णनुन्नी ने शुक्रवार को इरोड कलेक्ट्रेट में हसनूर ट्राइबल लैंटाना कैमारा एंटरप्राइज ग्रुप को मशीनें सौंपीं.

ईंधन ब्रिकेट की उच्च मांग

धमोदरन के अनुसार जिले के उद्योग हर महीने अन्य जिलों से 5 लाख टन ईंधन की लकड़ी खरीदते हैं और उनकी उच्च ईंधन दक्षता के कारण ईंधन ब्रिकेट की अच्छी मांग है. उन्होंने बताया कि हसनूर के वन क्षेत्र में तीन स्थानों से 100 हेक्टेयर में लैंटाना हटाने के लिए हसनूर प्रमंडल के जिला वन अधिकारी से अनुमति प्राप्त कर ली गयी है.

उन्होने आगे कहा कि ब्रश कटर लैंटाना को काट देगा और चिप्पर खरपतवार को चूर्णित करेगा और ब्रिकेट बनाने के लिए संपीड़ित करेगा जो ट्रेलर में एकत्र किया जाएगा. “शुरुआत में, 15 सदस्यों को काम के लिए तैनात किया जाएगा और इसे 70 सदस्यों तक बढ़ाया जाएगा.

जंगल के लिए खतरा

कृष्णनुन्नी ने कहा कि हालांकि आक्रामक खरपतवार ने जंगलों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है.  आदिवासी लोगों की आजीविका में सुधार के लिए टीएनवीकेपी के माध्यम से लैंटाना से फर्नीचर बनाने सहित परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इनमें से एक टन ब्रिकेट 6,000 रुपये में बेचा जाता है.  जिससे प्रत्येक कामकाजी व्यक्ति को 300 रुपये की दैनिक आय प्राप्त हो सकती है. “परियोजना हसनूर में आदिवासी लोगों के नियमित रोजगार और आर्थिक विकास सुनिश्चित करती है”.

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