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तमिलनाडु: आदिवासी राजस्व पोरम्बोक भूमि को वन विभाग को देने पर विरोध क्यों कर रहे हैं

Posted on December 21, 2022 - 10:58 am by

तमिलनाडु में कदंबुर हिल्स के आदिवासियों ने 20 दिसंबर को सत्यमंगलम में तहसीलदार और जिला वन अधिकारी को एक याचिका सौंपी. जिसमें आदिवासी 133.50 एकड़ राजस्व पोरम्बोक भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित करने का विरोध कर रहे थे. आदिवासी उन जमीनों पर खेती करतै हैं

छप्पन परिवार करते हैं खेती

सत्यमंगलम प्रखंड में वन भूमि का उपयोग कर मैदानी एवं पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों को संचालित करने हेतु प्रस्ताव तैयार किये गये थे. राजस्व पोरम्बोक भूमि को वन विभाग को सौंपी जाने वाली क्षतिपूरक भूमि के रूप में चिन्हित किया जा रहा था.

पिछले कई वर्षों से जर्मलम में लगभग छह परिवार 17 एकड़, पावलकुट्टई में 10 परिवार 31.50 एकड़ और ओसापलयम में 85 एकड़ में 39 परिवार खेती कर रहे हैं. राज्य सरकार ने 1989 में पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि भूमि के लिए पट्टा जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसलिए  उनके पास भूमि के लिए पट्टा नहीं है.

दोगुनी भूमि देने की आवश्यकता नहीं है

तमिलनाडु ट्राइबल पीपल एसोसिएशन के बैनर तले लोगों ने सत्यमंगलम के तहसीलदार को अपनी याचिका में कहा कि वन (संरक्षण) नियम, 2003 की धारा 7 (2) (डी) के अनुसार  जब भूमि का उपयोग  गैर-वन के उद्देश्य के लिए किया जाता है.  राज्य सरकार समतुल्य क्षेत्र की भूमि का अधिग्रहण कर सकती है और डायवर्जन के लिए प्रस्तावित क्षेत्र से दोगुनी भूमि प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है.

याचिका में कहा गया है कि लोग कई वर्षों से जमीन का उपयोग कर रहे हैं और उनके पास कोई अन्य आजीविका नहीं है.

याचिका में कहा गया है, “जब गुठियालाथुर क्षेत्र में 100 एकड़ से अधिक पोरम्बोक भूमि उपलब्ध है, तो आदिवासी लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली भूमि का अधिग्रहण करने की क्या आवश्यकता है” और प्रस्ताव को ‘अनुचित’ करार दिया. मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष के. रामासामी, सचिव जीवबराथी और अन्य उपस्थित थे.

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