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तेलंगाना:  62 साल पुरानी परंपरा को जिंदा रखने के लिए आदिवासी महिला ने पीया 2 किलो तेल

Posted on January 10, 2023 - 1:48 pm by

तेलंगाना में आदिलाबाद जिले के नारनूर मंडल मुख्यालय में पांच दिवसीय वार्षिक मेला खामदेव जतारा आयोजित की जानी है. जिसमें एक आदिवासी महिला ने 62 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए शांति और समृद्धि के लिए ढाई किलो तिल का तेल पिया. यह वार्षिक उत्सव हिंदू कैलेंडर वर्ष के अनुसार पौष के पवित्र महीने में पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है.

पैतृक बहनों को पीना पड़ता है तिल का तेल

थोडासम आदिवासी कामदेव भगवान को अपने पारिवारिक देवता के रूप में पूजते हैं. इन जनजाति की परंपरा के अनुसार जनजाति की पैतृक बहनों में से एक को तीन साल की अवधि में वार्षिक उत्सव के दौरान बड़ी मात्रा में घर का बना तिल का तेल पीना पड़ता है.

न्युज 18 के अनुसार महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के जिविथी तालुक के कोड्डेपुर गांव के मेसराम नागुबाई  ने बड़ी मात्रा में तिल का तेल पीकर वार्षिक उत्सव की शुरुआत की. बाद में मंदिर समिति के सदस्यों ने उनका अभिनंदन किया.

1961 में शुरू हुई यह परंपरा

आदिवासियों का मानना है कि परंपरा को आगे बढ़ाने से किसानों को अच्छी उपज मिलेगी और समुदाय में खुशी और सद्भाव आएगा. उनके अनुसार यह परंपरा 1961 में शुरू हुई थी. तब से कुल की 20 से अधिक सगी बहनें इस परंपरा को सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं. अब बारी है मेसराम नागुबाई की जो आने वाले दो सालों में तिल का तेल पीकर परंपरा को पूरा करेंगी. तेलंगाना और महाराष्ट्र के सैकड़ों भक्तों के साथ आदिलाबाद जिला परिषद के अध्यक्ष राठौड़ जनार्दन, आसिफाबाद के विधायक अत्राम सक्कू ने इस कार्यक्रम में भाग लिया.

क्या कहना है डॉक्टरों का

आदिलाबाद के राजीव गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के डॉ राहुल ने शरीर पर इस तरह की प्रथाओं के प्रभावों पर बोलते हुए कहा, “यह शरीर की सहनशक्ति पर निर्भर करता है.  बहुत अधिक मात्रा में तेल या खाद्य पदार्थ पीने से शरीर  के पाचन तंत्र में पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. एक बार में भारी मात्रा में तेल का सेवन करने से उल्टी हो सकती है, इस तरह के सेवन से भविष्य में पाचन तंत्र स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होंगी.

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