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तेलंगाना:  आदिवासी होने के कारण प्रोफेसर पदनाम नही दिया जा रहा

Posted on December 24, 2022 - 11:44 am by

एसोसिएट प्रोफेसर बी.आर. दोरास्वामी नाइक ने 23 दिसंबर को जेएनटीयू-काकीनाडा अधिकारियों पर भेदभाव का आरोप लगाया है. उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारी प्रोफेसर की पदवी से वंचित कर रहे हैं क्योंकि वे अनुसूचित जनजाति से संबंध रखते हैं. दोरास्वामी जेएनटीयू-काकीनाडा में पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं. दोरास्वामी सुगाली जनजाति से संबंध रखते हैं.

नाइक ने कहा कि वह मई 2021 से अपने ‘सही पदनाम’ के लिए जेएनटीयू-काकीनाडा के साथ संघर्ष में लगे हुए हैं. जून 2021 के एक पत्र के अनुसार  तत्कालीन जेएनटीयू-के रजिस्ट्रार ने कहा है, “जेएनटीयू-काकीनाडा के प्रभारी कुलपति को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत ग्रेड पे (स्टेज 4 से राज्य 5) देने की खुशी है. सीएएस के तहत पदनाम देने पर सरकार से मंजूरी मिलने पर विचार किया जाएगा.”

अनुसूचित जनजाति होने के कारण प्रोफेसर होने से किया जा रहा है वंचित

जेएनटीयू-के रजिस्ट्रार एल सुमलता को 23 दिसंबर को लिखे एक पत्र में नाइक ने कहा कि वह मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं. मुझे प्रोफ़ेसर स्केल पर पदोन्नत किया गया था लेकिन ‘प्रोफेसर’ पदनाम नहीं दिया गया था. यह मेरे प्रति बहुत बड़ा अन्याय और भेदभाव है क्योंकि मैं एक अनुसूचित जनजाति का हूं. मुझे लगता है कि मुझे प्रोफेसर पद से वंचित करने का कोई और कारण नहीं है. यह मेरे लिए बहुत बड़ी मानसिक पीड़ा है.

नाइक ने आरोप लगाया कि जिन सात गैर-आदिवासी शिक्षण संकायों को उनके साथ पदोन्नत किया गया था, उन्हें संबंधित पदनाम दिए गए थे.

दोरास्वामी ने कहा, “शुक्रवार को  मैंने आंध्र प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग को प्रोफेसर पदनाम से इनकार के बारे में अवगत कराया”

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