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सरकार ने माना, आदिवासियों के साथ हो रहे हिंसा की नहीं है कोई जानकारी

Posted on March 2, 2023 - 5:49 pm by

केंद्र सरकार भले ही आदिवासियों के खिलाफ हो रहे अत्यचार को रोकने के संबंध में तमाम दावें करती हो, लेकिन केंद्र सरकार ने स्वयं माना है कि आदिवासियों के साथ हो रहे हिंसा की सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है.  

उत्तर प्रदेश के सहानपुर से सांसद हाजी फजलुर रहमान जनजातीय मंत्रालय से सवाल पूछा था कि क्या सरकार के पास विभिन्न राज्यों के राष्ट्रीय उद्यानों में रहने वाले जनजातीय लोगों का पुनर्वास करने का विचार है और क्या वन क्षेत्र में रहने वाले जनजातियों पर हो रहे शोषण के संबंध में सरकार जानकारी रखती है.

इसके जवाब में केंद्रीय राज्य जनजातीय मामलों में मंत्री बिश्वेश्वर टूडू ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय(MOEFCC) का हवाला देते हुए बताया था कि मुख्य बाघ आवासों से लोगों के स्वैच्छिक पुन: पुनर्वास के लिए पैकेज जिसमें राष्ट्रीय पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन नीति, 2007 के प्रावधान शामिल हैं. पुनर्वास पैकेज को वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पुन: स्थापित करने में शामिल कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है.

पैकेज में दो विकल्प है. पहले में वन विभाग पुनर्वास प्रक्रिया को शामिल किए बिना यदि परिवार ऐसा करने का विकल्प चुनता है तो परिवार को 15 लाख दिया जाता है. वहीं दूसरे में वन विभाग द्वारा संरक्षित क्षेत्र या टाइगर रिजर्व से गांव का पुन: पुनर्वास कराना. इस नीति में राज्य स्तरीय निगरानी समिति और जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति द्वारा पुन: स्थापन प्रक्रिया की निगरानी करने का प्रावधान है.  

भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियमावली, 1961 के अनुसार वन्यजीव संरक्षण, परिरक्षण, सुरक्षा, बाघ परियोजना और हाथी परियोजना सहित योजना और वन्य जीव संरक्षण और जंगली पक्षियों और जानवरों की सुरक्षा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रशासित है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अनुसार वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों के शोषण की ऐसी कोई घटना राज्य सरकार प्रशासन द्वारा मंत्रालय को कोई औपचारिक रूप से सूचना नहीं दी गई है.

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