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मध्यप्रदेश: आवास योजना का मकान गिराने के बाद घर मालिक ने की आत्महत्या

Posted on October 27, 2022 - 10:44 am by

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक आदिवासी व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली. यह कदम उन्होने तब उठायी जब वन विभाग ने उनकी घर तोड़ दी. मृतक के पुत्र का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने उनके माता-पिता की पिटाई की थी और परेशान किया जा रहा था.

क्या है मामला  

कसरावद के अनुमंडल अधिकारी अग्रीम कुमार अनुसार घटना मंगलवार दोपहर की है. जिसमें नवलपुरा गांव में व्यक्ति ने अपने घर में फांसी लगा ली. मृतक की पहचान ध्यान सिंह (45) के रूप में की गई है. खरगोन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने इसकी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए.

मृतक के बेटे राजू ध्यान सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली थी. उनका आवास वन विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के गिरा दिया. मकान गिराने के दौरान विन विभाग के अमले ने उनके माता-पिता को पीटा था. वन विभाग द्वारा परेशान किए जाने के बाद उनके पिता ने सुसाइड कर लिया.

वन अधिकारी पर  परेशान करने का आरोप, कलेक्टर ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

गोपालपुरा के पंचायत सचिव मुन्नालाल सिसोदिया ने बताया कि मृतक को घर के लिए पीएमएवाई के तहत पहली किस्त के रूप में राशि आवंटित की गई थी. लेकिन वन विभाग ने प्रारंभिक निर्माण को ध्वस्त कर दिया. अनुमंडल अधिकारी अग्रिम कुमार ने कहा कि सुसाइड की घटना के बाद बुधवार को स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दिया. वन विभाग के अधिकारियों पर परेशान करने का आरोप है. इस मामले को लेकर कलेक्टरने 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

मुआवजे की मांग

आत्महत्या की इस घटना को लेकर आदिवासी संगठन जयस के स्थानीय पदाधिकारी दयाराम कुर्कू ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. जिसमें वन विभाग के अधिकारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की है. संगठन ने मृतक के बेटे के लिए सरकारी नौकरी और परिवार के लिए 50 लाख रुपये की सहायता की भी मांग की है.

वन विभाग की सफाई,  नोटिस जारी किया था

वहीं  खरगोन के उप मंडल मजिस्ट्रेट नारायण सिंह बडकुल ने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीणों ने विरोध समाप्त कर दिया. मृतक के परिवार को जिला रेड क्रॉस कोश से 25,000 रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता मंजूर की. पुलिस ने इस मामले में जांच चलने की बात कही है.

वन अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि उसने वन भूमि पर कब्जा कर लिया था. लगभग एक महीने पहले ये अतिक्रमण हटा दिया गया था. उन्होंने कहा कि उसे उसका पक्ष जानने के लिए एक नोटिस भी दिया गया था.

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