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नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज के अवधि विस्तार पर रोक नहीं लगाने की बात महज अफवाह: झारखंड सरकार

Posted on March 17, 2023 - 5:24 pm by

नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज के अवधि विस्तार पर रोक नहीं लगने की बात महज अफवाह है, सीएम हेमंत सोरेन ने साल 2022 में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया था. अब नेतरहाट में झारखंड सरकार के निर्णय के बाद किसी तरह का सैन्य अभ्यास हजारों ग्रामीणों की भावनों को देखते हुए नहीं किया जाएगा.

आदिवासियों के द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 22-23 मार्च को नेतरहाट के टुटूवापानी मोड़ में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज के विरोध में जमा होने की तैयारी की जा रही है. इसे देखते हुए झारखंड सरकार ने स्पष्टता जाहिर की है, जिसमें सरकार ने कहा है कि साल 2022 में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया था.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज में नहीं होगा सैन्य अभ्यास

सीएम हेमन्त सोरेन के आदेश के बाद वर्ष 1994 से अबतक तोपाभ्यास बंद रहने एवं लम्बे अवधि से हजारों ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए The Manoeuvres field Firing and Artillery Practice Act, 1938 एक्ट Chapter II के कंडिका-9 के आलोक में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में अस्वीकृत कर दिया गया था.

फैलाई जा रही सूचना निराधार

मीडिया और सोशल मीडिया में माध्यम से यह बात फैलाई जा रही है कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज रद्द नहीं हुआ है. जबकि राज्य सरकार के पत्रांक-582, दिनांक-29.08.2022 एवं पत्रांक-376, दिनांक- 14.06.2022 में स्पष्ट उल्लेख है कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के आदेश पर अस्वीकृत कर दिया गया है. अब यहां राज्य सरकार के निर्णय के उपरांत किसी तरह का सैन्य अभ्यास हजारों ग्रामीणों की भावनाओं को देखते हुए नहीं किया जाएगा.

क्या है नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज का मामला

अविभाजित बिहार सरकार ने 1954 में सेना मैनूवर्स फील्ड फायरिंग आर्टिलरी एक्ट, 1938 की धारा 9 के तहत नेतरहाट पठार के सात राजस्व गांवों में 8 वर्ग किलोमीटर को सेना द्वारा टोपाभ्यास के लिए अधिसूचित किया गया था. वर्ष 1964 से लेकर 1994 तक लगभग 30 तीस सालों तक यहाँ रूटीन तोपाभ्यास होता रहा है।.

1991-92 में अविभाजित बिहार सरकार ने गजट नोटिफिकेशन के जरिये इस फायरिंग रेंज के क्षेत्र का दायरा और अवधि बढ़ा दी. इस गज़ट नोटिफिकेशन के जरिये इसमें लातेहार और गुमला के 157 मौजों  के मातहत 245 गांव की 1471 वर्ग किलोमीटर भूमि को अधिसूचित किया गया था जिसे 2002 तक के लिए बढ़ा दिया गया. जिसे 1999 में पुन: बिहार सरकार ने इसकी अवधि 11 मई 2022 तक के लिए बढ़ा दी.

वर्ष 1964-94 तक तोप दागने का सघन और निरंतर अभ्यास चला था. शुरूआत के चार-छह सालों यानी 1964-70 के बीच यहाँ सेना अपने छावनी बनाकर रही और सघन तोपाभ्यास किया. उसकी कड़वीं यादें अभी भी पीढ़ी दर पीढ़ी यहाँ बसे आदिवासी समुदायों में मौजूद हैं. इन चार सालों में सघन अभ्यास के दौरान जो प्रताड़ना और उत्पीड़न इन दो जिलों के जंगली इलाकों में सदियों से बसे आदिवासी समुदायों का हुआ उससे यहाँ फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन संघर्ष समिति जैसा संगठन वजूद में आया. यह संगठन आज़ाद हिंदुस्तान में उन कुछ विरले सामाजिक संगठनों और अहिंसक आंदोलनों में गिना जाता है जो तीन दशकों की लंबी अवधि में निरंतर जारी रहा.

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