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भारत का वो आदिवासी राजनेता, जिन्होंने देखा था राष्ट्रपति बनने का सपना

Posted on March 4, 2023 - 4:04 pm by

भारत के आजादी के ठीक बाद असम के तत्कालीन गारो हिल्स (वर्तमान मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स) में एक ऐसे आदिवासी नेता का जन्म हुआ था, जिन्होंने सबसे पहले सपना देखा था कि एक आदिवासी भारत के राष्ट्रपति पद पर बैठे. इसके लिए उन्होंने वर्ष 2012 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव भी लड़ी. हालांकि वे राष्ट्रपति पद का चुनाव हार गए, लेकिन वह सपना आखिर में द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद खत्म हुआ. लेकिन यह देखने के लिए वह जीवित नहीं थे. उनका नाम है पूर्णो अगितोक संगमा, जिसे पीए संगमा के नाम से भी जाना जाता है.

जन्म और संघर्ष

पीए संगमा का जन्म 1 सितंबर 1947 को हुआ था. संगमा महज 11 वर्ष के रहे होंगे, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया. यहां तक की गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी. हालांकि सेल्सियन फादर जियोवन्नी बतिस्ता बसोलिन के कारण फिर से स्कूल लौटने में सफल रहे. बाद में उन्होंने शिलांग के संत एंथोनी कॉलेज से कला स्नातक की पढ़ाई पूरी की. असम के डिब्रूगढ़ में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एमए की पढ़ाई करते हुए डॉन बॉस्को हाई स्कूल में पढ़ाया.

संगमा ने 1973 में सोरादिनी के. से शादी की. उन्हें दो बेटे और दो बेटियां प्राप्त हुए. बेटे कॉनराड संगमा को राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया वहीं बेटी अगाथा एक राजनीतिज्ञ हैं. अगाथा 2009 में 15वीं लोकसभा चुनाव में तुरा से चुनी गईं और 29 साल की उम्र में यूपीए सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्री थीं.

पीए संगमा ने 1988 से 1990 तक मेघालय के मुख्यमंत्री के रुप में पदभार भी संभाला और 1996 से 1998 तक लोकसभा के अध्यक्ष भी रहे. वर्ष 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव भी लड़ा, जिसका समर्थन BJP और AIADMK ने किया था. हालांकि कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी से चुनाव में हार गए. उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया, जो कि भारत का दूसरा सर्वोच्च सम्मान है. वे मेघालय के पहले व्यक्ति थे जिन्हें यह सम्मान मिला था.

पीए संगमा के करियर की शुरूआत वर्ष 1973 में हुई, जब उन्हें प्रदेश युथ कांग्रेस का उपाध्यक्ष(vice-president) बनाया गया. इसके बाद वर्ष 1975 में मेघालय कांग्रेस का महासचिव बनाया गया. वे वर्ष 1980 तक महासचिव पद पर बने रहे.
वहीं वर्ष 1977 में पहली बार मेघालय के तुरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. उसी लोकसभा से पीए संगमा 1977-1988, 1991-2008, 2014-16 तक कई बार सांसद बने. वर्ष 1988 और 2008 में मेघालय की राजनीति में शिफ्ट हुए थे. जिसमें 1988-1990 तक मेघालय के मुख्यमंत्री बने थे.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(NCP) का निर्माण

पीए संगमा, शरद पवार और तारिक अनवर को 20 मई 1999 कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया, क्योंकि उन्होंने सोनिया गांधी को विदेशी होने के कारण उनका विरोध किया था. उनका मानना था कि देश का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री पद पर होना चाहिए. इसलिए उन्होंने शरद पवार और तारिक अनवर के साथ वर्ष 1999 में एक पार्टी बनायी जिसका नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दिया गया.
जनवरी 2004 में शरद पवार जब सोनिया गांधी के करीब हुए,तो संगमा ने पार्टी का विभाजन कर दिया. हालांकि वे NCP चुनाव चिन्ह की लड़ाई हार गए. उसके बाद अखिल भारतीय तृणमुल कांग्रेस के साथ अपने गुट का विलय कर दिया, जिससे राष्ट्रवादी तृणमुल कांग्रेस(NTC) का जन्म हुआ. संगमा NTC के निर्वाचित दो सांसदों में से एक थे. उन्होंने 10 अक्टूबर 2005 को AITC के सदस्य के रूप में अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और फरवरी 2006 में NCP उम्मीदवार के रूप में फिर से चुने गए. उन्होंने 2008 में मेघालय विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए मार्च 2008 में दूसरी बार 14 वीं लोकसभा से इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद 5 जनवरी 2013 को संगमा ने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल पीपुल्स पार्टी की शुरुआत की. वर्ष 2013 के मेघालय विधान सभा चुनाव में नेशनल पीपुल्स पार्टी ने दो सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की. 2014 में संगमा तुरा से लोकसभा के लिए चुने गए और 2016 में उनकी मृत्यु हो गई.

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