Skip to main content

तमिलनाडु की इन दो जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया

Posted on December 23, 2022 - 5:38 pm by

विजय उरांव

दोनों समुदायों को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा थी और इस विधेयक के जरिए उन्हें अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों से संरक्षित किया जा रहा है. तमिलनाडु की नारिकुर्वर और कुरूविकरण पहाड़ी जनजातियों के लोगों की संख्या बहुत अधिक नहीं है. लेकिन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले इन समुदायों को न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रयास किया गया है. राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा

संसद ने तमिलनाडु की दो जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में डालने के प्रावधान वाले ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ को बृहस्पतिवार को मंजूरी प्रदान कर दी.

पिछले सप्ताह यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है

राज्यसभा ने 22 दिसंबर को इस विधेयक को मंजूरी दे दी. लोकसभा में यह विधेयक पिछले सप्ताह पारित हो चुका है. मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी. ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ में तमिलनाडु की नारिकुर्वर और कुरूविकरण पहाड़ी जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का प्रावधान है.

मुंडा ने कहा कि दोनों समुदाय लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे और अब उन्हें न्याय सुनिश्चित हो सकेगा.

कई समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिय़े जाने की मांग

चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने अपने-अपने प्रदेशों में कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिये जाने की मांग की थी. इस पर मुंडा ने कहा कि इस सूची में किसी जनजाति को शामिल करने के लिये एक पद्धति है जिसका पालन किया जाता है.

मुंडा ने कहा कि राज्यों को उचित दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव पेश करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस संबंध में नरेंद्र मोदी सरकार संवेदनशील है और सरकार ने इस दिशा में पहले भी कदम उठाए हैं तथा विसंगतियों को दूर करने के प्रयास किए हैं.

मुंडा ने कहा कि आदिवासी लोगों की एक विशिष्ट जीवन शैली होती है और वे शांति के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों में, पहाड़ों व जंगलों में रहते हैं तथा संस्कृति एवं प्रकृति के साथ अगाध प्रेम बनाए रखते हुए स्थानीय स्तर पर अपनी आजीविका की तलाश करते हैं.

इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के जी वी एल नरसिंहा राव ने कहा कि तमिलनाडु की नारिकुर्वर और कुरूविकरण पहाड़ी जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए यह विधेयक लाया गया है.

इन जनजातियों की जनसंख्या बहुत ही कम है

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु बड़ी आबादी वाला राज्य है और वहां नारिकुर्वर और कुरूविकरण पहाड़ी जनजातियों के लोगों की संख्या बहुत कम है. लेकिन इसके बावजूद दोनों जनजातियों को अनुसूचति जनजाति की सूची में शामिल करने के केंद्र सरकार के फैसले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ के सिद्धांत की पुष्टि होती है.

भाजपा सदस्य ने कहा कि समाज की मुख्यधारा से दूर इन आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने से इनके विकास की राह आसान होगी.

उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास मंत्रालय को मैदानी इलाकों तथा पहाड़ी इलाकों में रहने वाली जनजतियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए. क्योंकि दोनों स्थानों की भौगोलिक स्थिति में अंतर है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा लोकसभा और विधानसभा की सीटों के लिए आरक्षण व्यवस्था करते समय परिसीमन आयोग की रिपोर्ट तथा सिफारिशों को भी ध्यान में रखना चाहिए.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.