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टिपरा मोथा ने हासिल की अलग आदिवासी राज्य की पहली राजनीतिक जीत

Posted on March 3, 2023 - 1:10 pm by

भारत में विलय करने वाली आठ सौ साल पुराने अंतिम रियासत त्रिपुरा माणिक्य वंश के ‘महाराजा’ के एकमात्र उत्तराधिकारी प्रद्योत किशोर देबबर्मन ने अपनी पहली राजनीतिक जीत हासिल की है. बता दें कि टिपरा मोथा आदिवासियों के लिए एक अलग राज्य की मांग कर रहे हैं या संवैधानिक हल की मांग कर रहे हैं.

देबबर्मन की टिपरा मोथा पार्टी 2021 में शुरू हुई थी. भले ही टिपरा मोथा इस चुनाव में अपनी शुरुआत में बीजेपी पार्टी से पीछे रह गई हो, लेकिन देबबर्मन ने 20 आदिवासी आरक्षित सीटों पर अपने पैसों से चुनाव लड़ी. टिपरा मोथा पार्टी की शुरू में भाजपा, कांग्रेस और वामपंथियों को एक ही बार में हराकर आदिवासी स्वायत्त परिषद(ADC) के चुनाव में जीत हासिल की.

प्रद्योत देबबर्मन का कहना है कि  हम त्रिपुरा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं इसलिए हम विपक्ष में बैठेंगे लेकिन सीपीएम या कांग्रेस के साथ नहीं बैठेंगे. हम स्वतंत्र रूप से बैठ सकते हैं.  जब भी उन्हें जरूरत होगी, हम सरकार की मदद करेंगे.

आदिवासी आरक्षित 20 सीटों में मोथा ने 13 पर जीत दर्ज की. भाजपा ने अपने सहयोगी पार्टी आईपीएफटी को छह सीटों पर लड़ाया था. लेकिन एक ही सीट जीतने में कामयाब रही.

पिछला चुनावी गणित

पांच साल पहले आदिवासियों ने भारी मात्रा में बीजेपी को वोट दिया था, जिसमें बीजेपी को 10 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि आईपीएफटी आठ में जीती थी. इसके अलावा बाकी दो सीटों के विधायक ने वामपंथ में शामिल हो गए थे.

राज्य के जनजातीय समूहों पर माणिक्य वंश का शासन था, जिसकी शुरुआत 1280 में रत्न माणिक्य से हुई थी, जब तक कि 1947 में बीर बिक्रम के शासन के दौरान रियासत का भारत में विलय नहीं हो गया। उनके सभी वंशज नाममात्र के हैं.

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