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आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए आदिवासियों को हरे पर्दे में ढका

Posted on April 1, 2023 - 5:54 pm by

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ईएएस सरमा (EAS Sarma) ने कुछ तस्वीरें साझा की, जिसने प्रशासन और आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी  सरकार पर सवाल उठा दिए है. तस्वीरों में विशाखापत्तनम शहर के बीचों बीच प्रशासन ने सड़क के दोनों ओर हरे रंग का तिरपाल लगाया है. बताया जा रहा है कि यह तिरपाल वहां के झुग्गियों में रहने वाले आदिवासियों को छिपाने के लिए लगाया गया.

बता दें कि भारत इस साल जी20 की अध्यक्षता कर रहा है. जिसको लेकर इन दिनों देश के कई शहरों में जी20 की बैठक हो रही है. आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम  में भी 28 और 29 मार्च को इस बैठक का आयोजन किया गया. ऐसे में पूरे शहर को सजाया गया. प्रशासन ने शहर के सौंदर्यीकरण के लिए कथित तौर पर 157 करोड़ रुपए खर्च किए.

सड़क के दोनों ओर जिन आदिवासियों को छिपाने के लिए हरे पर्दे लगाएं गए है, उसमे विशेष रूप से चेंचू समुदाय के लोग रहते है. इसमें करीब 134 परिवार बसे है उनमें से करीब 80 परिवार चेंचू समुदाय के हैं. बता दें कि चेंचू समुदाय विशेष रुप से कमजोर जनजाति वर्ग (PVTG) में शामिल है.

इन तस्वीरों को साझा कर ईएएस सरमा ने प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, “जीवीएमसी (GVMC) यानी ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर पालिका की ये नई नौटंकी है कि यह हवाई अड्डे से शहर तक के मार्ग के किनारे स्थित झुग्गियों को हरा-भरा कर रही है. ये बदरंग बस्तियां जीवीएमसी और सरकार की विफलता का एक स्थायी प्रमाण हैं. जीवीएमसी ने नए बजट से झुग्गियों का विकास के लिए 40 फीसदी देने के बजाए ठेकेदारों को दिया है. इससे भ्रष्टाचार का पता चलता है.

झुग्गियों में रहने वाले समुदाय

इन हरे रंग के पर्दों के पीछे चेंचू जनजाति, कोंडादेवरा और मोदीबांडा समुदाय के करीब 400 लोग रहते है. इसमें कोंडादेवरा और मोदीबांडा डीनोटिफाइट घुमंतू समुदाय है जो सामाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े है.

इन लोगों के पास सामुदायिक प्रमाण पत्र नहीं हैं और इसलिए वे किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाने में असमर्थ हैं. इन झुग्गियों में रहने वाले बहुत से निवासी कूड़ा बीनने या अन्य अनौपचारिक कार्यों के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं.

ASR नगर कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि पिछले छह महीनों में कम से कम तीन बार उन्हें जगह छोड़ने के लिए परेशान किया गया.

ईएएस सरमा के मुताबिक निवासियों को पिछले साल नवंबर में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान और इस साल मार्च के पहले सप्ताह में हाल ही में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के लिए जमीन खाली करने के लिए कहा गया था.

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा था कि राज्य की राजधानी को जल्द ही वैजाक(vizag) में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

इस दौरान लोगों ने पूछा, “उन्होंने हमें इन चादरों से क्यों छुपाया? नेता चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि हमें पहले से आवंटित मकान दिए जाए. अगर उन्होंने हमें अपना घर दिया होता तो इन सबकी कोई जरूरत नहीं होती.”

लेकिन इसके उलट सरकार ने इन चादरों के पीछे अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश की है.

हालांकि ये पहली बार नहीं है जब इस तरह के मामले सामने आए हो. यह एक परिचित कहानी है. साल 2017 में इवांका ट्रम्प की यात्रा के लिए हैदराबाद में भिखारियों को अपराधी बनाने से लेकर 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दिल्ली में गरीबों को बेदखल करने या छुपाने जैसी खबरें हमने देखी.

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