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किसी कीमत पर जल, जंगल और जमीन से आदिवासी समझौता नहीं कर सकता : अर्जुन मुंडा

Posted on February 15, 2023 - 11:16 am by

आदिवासी के जीवन का आधार प्रकृति है. वे जंगलों के साथ जीवन जीते है. प्रकृति हमारी है और हम प्रकृति के हैं, इसी भावना से आदिवासी जंगलों के साथ जीवन जीते हैं. प्रकृति ही आदिवासियों की परंपरा, जीवन पद्धति और संस्कृति है. आदिवासी अपनी इस संस्कृति को छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए किसी भी कीमत पर आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन से समझौता नहीं कर सकते हैं. अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को झारखंड में अपने संसदीय क्षेत्र खुंटी के मुरहू प्रखंड के कुंजला गांव में आयोजित तिड़ू संकुरा पड़हा जतरा को संबोधित करते हुए कही.

आदिवासी एक दूसरे के पूरक बने

उन्होंने कहा कि शासन पद्धति विकसित होने के बावजूद आदिवासी हमेशा स्वशासन व्यवस्था के साथ ही रहे. आदिवासियों की परंपरा पर कभी कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ. आदिवासियों को उनका अधिकार देने के काम में लगे अधिकारियों को यह साफ निर्देश दिया गया है कि आदिवासियों की जीवन पद्धति के आधार को मजबूत कर रहे हैं. इस सोच के साथ उनका डॉक्यूमेंटेशन करना है, ताकि वन एवं वन के अंदर रहनेवाले आदिवासी एक दूसरे का पूरक बनके रहें.

प्रकृति के संबंध के साथ जीने की परंपरा ही आदिवासियत है

मंत्री ने कहा कि आधुनिकता की इस दौड़ में जंगलों के साथ होनेवाली छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप आज वातावरण में बदलाव होने लगा है, लेकिन आदिवासी कभी जंगलों से छेड़छाड़ नहीं करते. प्रकृति से संबंध के साथ जीने की परंपरा ही आदिवासियत है, यही हमारी संस्कृति है. इससे पूर्व आयोजन स्थल में केंद्रीय मंत्री के पहुंचने पर पारंपरिक रीति रिवाज से उनका भव्य स्वागत किया गया. बाजे गाजे और नृत्य दलों के साथ उन्हें मंच तक ले जाया गया. मंच पर तिड़ू पड़हा राजा जकरियस तिड़ू की अगुवाई में केंद्रीय मंत्री को आदिवासी पगड़ी बांधकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया.

प्रति वर्ष 14 फरवरी को आयोजित होनेवाले तिड़ू पड़हा जतरा में तिड़ू पड़हा अंतर्गत 52 गांवों से जनजातीय समुदाय के महिला पुरुष एवं बच्चे अपने झंडे और नृत्य दलों के साथ शामिल हुए. पड़हा जतरा में पड़हा व्यवस्था पर चर्चा हुई और लोगों से नशापान को त्याग कर शिक्षा को अंगीकार करते हुए विकास के पथ पर अग्रसर होने की अपील की गई. इस दौरान सामूहिक नाच गान का भी दौर चला. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने भी नृत्य दलों के साथ ढोल बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया.

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