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महाराष्ट्र: आदिवासी परिवार को 12 साल बाद मिली जमीन, अनपढ़ होने का उठाया था फायदा

Posted on March 17, 2023 - 3:31 pm by

महाराष्ट्र में पनवेल तालुका के हेदुतने गांव के एक आदिवासी परिवार को पनवेल तहसीलदार विजय तालेकर और उरण सामाजिक संस्था यूएसएस(NGO) के सदस्यों के हस्तक्षेप के बाद एक बाहरी व्यक्ति से उनकी 3,200 वर्ग मीटर जमीन वापस मिल गई.

साल 2011 में राजस्थान के रहने वाले सुरेंद्र सिंह के द्वारा अनपढ़ होने का फाएदा उठाकर आदिवासी से 99 साल के लिए लीज अवैध रूप से ली गई थी. जो उस गांव में दशकों से कारोबार कर रहा था. इसके बाद से ही व्यवसायी ने परिवार को जमीन में घुसने से रोक दिया था.

यह जमीन अनंत पोकला और उसके परिवार की स्वामित्व वाली जमीन है. जिसे व्यवसायी सुरेंद्र सिंह ने पहले पोकला के माता-पिता से अवैध रूप से लीज करार कर कब्जा जमा लिया था.

बता दें कि बिना अनुमति के आदिवासियों के स्वामित्व वाली भूमि का लेन-देन नहीं किया जा सकता है.

साल 2016 में सुरेंद्र सिंह ने अपने एक आदिवासी सहयोगी हीरामन उघड़ा के साथ अवैध रूप से भूमि का बिक्री समझौता किया था. सिंह ने अपने मजदूरों के लिए घर बनवाए हैं, गैराज खोला है और जमीन पर गाय-भैंस रखे हैं.

अनंत पोकला ने कहा कि हमारे चिरनेर आश्रम स्कूल के शिक्षक महादेव दोईपोडे ने मुझे यूएसएस के प्रोफेसर राजेंद्र माधवी, सुधाकर पाटिल और अन्य से मिलने के लिए कहा था. इसके बाद मैंने पनवेल तालुका पुलिस स्टेशन और तहसीलदार से शिकायत की. यूएसएस ने पेपर वर्क का खर्च भी वहन किया. हमने गरीब होने के कारण बहुत कुछ सहा है.

स्थानीय सर्कल अधिकारी संतोष कचरे ने पनवेल तहसीलदार को एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पनवेल तालुका के सहायक पुलिस निरीक्षक तुकाराम कोराडे ने सभी पक्षों के बयान दर्ज किए. पनवेल तहसीलदार विजय तालेकर ने तीन महीने की सुनवाई प्रक्रिया के बाद आखिरकार आदेश दिया कि भूमि लेनदेन अवैध है. भूमि रिकॉर्ड कर्मचारियों के तालुका निरीक्षक ने सोमवार को माप किया और उसी का सीमांकन किया.

तालेकर ने कहा, ‘आदिवासी परिवार के नाम पर जमीन वापस कर दी गई है. अवैध कब्जाधारियों को पूरी जमीन खाली करने को कहा गया है. प्रो माधवी ने कहा कि जमीन को बहाली अधिनियम 1974 के तहत बहाल किया गया था. हम उन आदिवासियों की मदद करने के लिए तैयार हैं जिनकी जमीन अवैध रूप से छीन ली गई है.

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