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झारखंड: आदिवासी परिवार मांगकर खाने को मजबूर

Posted on October 19, 2022 - 11:43 am by
  • छ: महिने से पीएम गरीब कल्याण योजना का राशन नहीं मिला है
  • महाजन से कर्ज लेने को मजबूर है

आदिम जनजाति के 40 परिवारों को चार महिने से राशन नहीं मिला है. इन सभी परिवारों में भुखमरी की स्थिति है. यह मामला दरअसल झारखंड के गढ़वा जिले के चिनिया प्रखंड के मसरा गांव का है. मसरा गांव के परिवारों के अनुसार पिछले जुलाई अब तक उन्हें राशन नहीं मिला है. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का राशन भी छह महिने से नहीं मिला है.

गांव की उर्मिला देवी का कहना है कि घर में राशन नहीं था. कभी कुछ बनता है तो कभी नहीं बनता है. खाना नहीं बना है. दूसरे के घर से मांगकर बच्चों को खिलायी थी. रात को देखेंगे.. कुछ नहीं होगा तो रात को भी मांगकर खिलाएंगे.

स्थानीय अखबार के अनुसार मसरा गांव के बुधन कोरवा, रविंद्र कोरवा, सत्येंद्र कोरवा, मनिया कुमारी, मोहरमानी कुंवर, सरस्वती देवी, कुंती देवी, कमोदा देवी, प्रेमनी देवी, बसंती देवी, बचिया कुंवर, भुईनी देवी, बसमतिया देवी, सुषमा देवी सहित कई अन्य राशनकार्ड धारियों ने बताया कि राशन नहीं मिलने से हम भुखमरी का सामना कर रहे हैं. घर में कभी खाना बनता है तो कभी नहीं.

महाजन से कर्ज लेने को मजबूर

राशन और कहीं रोजगार न मिलने के कारण महाजन से उधार लेकर घर चला रहे हैं. उधार लेने पर 10 रूपये के दर से एक कि.ग्रा. महुआ देने का सौदा होता है. उसके अलावा प्रति 100 रू पर 10 रू ब्याज देकर घर चला रहे हैं. अधिकांश परिवार महाजन का कर्जदार हो गया है. और लगातार आदिम जनजाति परिवार कर्ज में डूब रहा है.

सरिता देवी कर्ज लेकर दिनभर में एक ही बार का खाना बना पाती है, और शाम को कभी-कभी बिना खाए भी सो जाते हैं. इस बार उनके खेत में धान और मकई भी नहीं हुआ जिससे उनका घर चलता है. वहीं प्रेमनी देवी कहती है कि कंद मूल खाकर हमलोग कभी कभार रह लेते हैं. और ब्याज पर पैसा लेकर अपना खर्च चला रहे हैं.

दो चार महिने में कभी कभार सब्जी भात बनता है

गांव की विनीता देवी अपने घर में नमक भात बनायी थी. उसके अनुसार दो चार महिने में कभी कभार ही घर में दाल भात सब्जी बन पाता है. वहीं उर्मिला देवी का कहना है कि उनके घर में राशन नहीं था. घर में चुल्हा नहीं जला था. भुख लगने पर जब उसके बच्चे खाना के लिए जिद करने लगे तो बगल से खाना लाकर दी. उसका राशनकार्ड भी नहीं है. इस तरह की स्थिति लगभग हर घर में है. गांव के लोग काम की तलाश में पलायन कर गए है. घरों सिर्फ महिलाएं और बच्चे हैं. आदिम जनजाति परिवार में कई लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है. हालत बद से बदतर है.

नमक भात दिखाती विनीता देवी

मशीन इंट्री न होने का बहाना

चिनिया प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी निशात अंजूम का कहना है कि डीलर की ओर से मशीन एंट्री नहीं करने पर यह समस्या उत्पन्न हुई है. उक्त आदिम जनजाति परिवारों को राशन नहीं मिल रहा है. सुधार के लिए जिला भेज दिया गया है. बहुत जल्द ही गड़बड़ी को ठीक कर लिया जाएगा. उसके बाद उनके बीच राशन का वितरण किया जाएगा

बता दे कि हाल ही में भारत को ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 में 107वें नंबर रखा गया है, जिसमें 121 देश शामिल थे. वहीं 2021 में 101वें नंबर पर भारत था, जिसमें 116 देश शामिल थे. इस बात से पता चलता है कि भारत भुखमरी की हालत में क्यों है.

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