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जनजातीय संगठनों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दी

Posted on March 29, 2023 - 1:01 pm by

जनजाति संगठनों ने सरकार से नागालैंड के लोगों को यह गारंटी देने को कहा है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने से भारतीय संविधान की धारा 371A का उल्लंघन नहीं होगा. अगर सरकार गारंटी नहीं देती है तो पारंपरिक आदिवासी संगठनों ने चुनाव के बहिष्कार की धमकी दी है.

बता दें कि अनुच्छेद 371ए के अनुसार नागा प्रथागत कानूनों(Customary law), प्रक्रियाओं(Procedures) और स्वामित्व और भूमि और इसके संसाधनों के हस्तांतरण के संबंध में संसद का कोई अधिनियम नागालैंड पर लागू नहीं होता है.

कोहिमा में 27 मार्च को सभी नागा जनजातियों के होहो(पारंपरिक संगठनों) ने एक पारंपरिक बैठक बुलायी थी, जिसमें 16 मई को शहरी स्थानीय निकायों(Urban local bodies) के चुनाव कराने के सरकार के फैसले पर चर्चा की गई थी. जो कि लंबे समय से लंबित चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तारीख तय की गई है.

साल 2001 में होहो ने नागालैंड म्युनिसिपल एक्ट की समीक्षा और पुनर्लेखन की मांग की थी, जिसमें सात सूत्रीय प्रस्ताव को अपनाया गया था. इन सात सूत्रीय प्रस्ताव मे महिलाओं के लिए आरक्षित सीट, संपति अधिकार और हर नगरपालिका में कर लगाने की शक्ति शामिल है.

होहो संगठनों ने 2001 के नागालैंड म्यूनिसिपल एकट को उधार का कानून बताया था. उन्होंने कहा था कि अनुचछेद 371ए के प्रावधानों का उल्लघंन करने वाले किसी भी हिस्से को हटाया जाना चाहिए.

होहो संगठनों का कहना है कि शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण से सही उम्मीदवार मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं, इसलिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित व्यक्ति(पुरूष या महिला) अध्यक्ष होना चाहिए.

होहो ने सरकार से नागालैंड के लोगों को गारंटी देने के लिए कहा कि महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण अनुच्छेद 371ए के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करेगा. उन्होंने समय पर उनकी मांगों को पूरा करने पर शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के संचालन में सहयोग का आश्वासन दिया.

होहो ने कहा कि अगर सरकार मांगों को पूरा किए बिना शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराती है तो चुनावों का बहिष्कार करने की धमकी देते हुए होहोस ने कहा कि उनके प्रस्तावों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इससे पहले नगालैंड की चरमपंथी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल के इसाक-मुइवा गुट ने नागालैंड में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तारीख 16 मई पर आपत्ति जताई थी.

नागा इतिहास

16 मई 1951 का दिन है जब नागा जनमत संग्रह “नागाओं की संप्रभु इच्छा और आकांक्षा की पुष्टि करने के लिए” आयोजित किया गया था. जैसा कि 14 अगस्त, 1947 को “एक स्वतंत्र और एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में रहने के लिए” घोषित किया गया था.

नागालैंड के शहरी स्थानीय निकाय के लिए आखिरी और एकमात्र चुनाव 2004 में महिलाओं के लिए बिना किसी आरक्षण के आयोजित किया गया था. हालांकि, साल 1993 में भारत के संविधान के 74वें संशोधन ने इस तरह के कोटा को वारंट किया था. महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों के आरक्षण के विरोध के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और दो व्यक्तियों की मौत के बाद राज्य सरकार ने साल 2017 के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को रोक दिया.

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