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छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज ने किया राज्य बंद

Posted on October 11, 2022 - 12:32 pm by

छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज द्वारा 32% आरक्षण की मांग को लेकर राज्य स्तरीय बंद किया गया था। इसका असर मूल रूप से कांकेर में देखने को मिली, जहां सोमवार को पूर्ण बंद रहा। इस मामले पर कवासी लखमा को जिम्मेवार ठहराते हुए उनके एक दिन का विशेष सत्र बुलाने को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने नाराजगी जताई है।


दरअसल आदिवासियों को 32% आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर आदिवासी समाज ने चक्काजाम व विरोध शुरू किया था, जो अब अधिक विकसित होते दिख रहा है। इसको बढ़ावा तब मिला, जब कांकेर चेंबर ऑफ कॉमर्स ने बंद को अपना समर्थन दिया। जिले के पखांजूर, दुर्गकोंदल, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, चारामा सभी जगहों में व्यापारियों ने अपने प्रतिस्ठानों को बंद रखा। छोटे-बड़े सभी दुकानों को बंद करने का आह्वान भी किया गया। आदिवासी लोग स्वयं भी जगह-जगह जाकर दुकानों को बंद करवा रहे थे।


यही वजह रही कि धरमलाल कौशिक ने आदिवासी आरक्षण के मसले को लेकर विधानसभा में विशेश सत्र बुलाने और अनुसूचित जनजाति के हक मारने के बयान के लिए सीधा कवासी लखमा पर निशाना दागा है। उनके अनुसार आदिवासियों का 12% आरक्षण के कम होने के मुख्य दोषी कांग्रेस सरकार है इसलिए डॉ रमन सिंह को दोष दिए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर 3 महीने में विधानसभा सत्र बुलाएं। हमें कोई दिक्कत नहीं है, 12 दिन-15 दिन का सत्र बुलाएं, हम स्वागत करते हैं। केवल यही मुद्दा नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर विधानसभा में बहस होनी चाहिए।


विरोध करने की प्रतिकृया प्रदेशभर में ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किए जाने की जानकारी सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष बीएस राउटे ने प्रदान की है। उन्होंने बताया कि सर्व आदिवासी समाज द्वारा 147 ब्लॉकों को बंद करने का आह्वान किया गया था। आदिवासी अपने अधिकारों के लिए धरना प्रदर्शण कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार आदिवासियों के हित में जल्द-से-जल्द निर्णय करें। अब वे अपना अधिकार लिए बिना पीछे नहीं हटने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं।