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ओड़िशा: आदिवासी छात्रों को मिलेगी अपनी भाषा में पढ़ने का मौका

Posted on October 18, 2022 - 4:08 pm by

ओडिशा सरकार ने आदिवासी बच्चों की भाषा से होने वाली मुश्किल से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. महिला एवं बाल विकास विभाग ने आठ और आदिवासी भाषाओं में शिक्षण सामग्री विकसित करने का निर्णय लिया है.

ये भाषाएं है शामिल

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रम पाठ्यक्रम ‘नुआ अरुणिमा’ (Nua Arunima) के तहत विभाग हो,  भूमिज, खड़िया, गब्बा जैसी भाषाओं में किताबें और शिक्षण सामग्री लेकर आएगा. 2014 में मातृभाषा आधारित शिक्षा योजना लागू होने के बाद से विभाग ने जुआंग, मुंडा, बोंडा, सौरा, शांताली, कुई, कुवी, कोया, किसान और कुड़ुख भाषाओं में नुआ अरुणिमा पाठ्यक्रम पहले ही तैयार कर लिया है. राज्य भर में 7,202 आंगनबाड़ियों में शिक्षण सामग्री वितरित की गई है.

ओड़िशा में किताबें SCSTRTI  द्वारा विकसित की जाएंगी.  मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रम वर्तमान में सरकार द्वारा 12 जिलों में ICDS के माध्यम से लागू किया जा रहा है.

अधिकारी के अनुसार आदिवासी समुदायों के बच्चों का खराब शैक्षिक प्रदर्शन भाषा की बाधा (उड़िया में शिक्षण) से जुड़ा हुआ है. जब वे औपचारिक शिक्षा शुरू करते हैं,  तो विभाग ने कार्यक्रम को आठ और आदिवासी भाषाओं में विस्तारित करने के बारे में सोचा है.

पाठ्य पुस्तक के अलावा शिक्षक उपलब्ध कराना चुनौती

ओडिशा के आदिवासी समुदायों में उनकी 21 भाषाएं हैं,  जिनको 74 बोलियों में बांटा गया है इसलिए यह काम काफी मुश्किल लगता है. पाँचवीं कक्षा तक मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में निर्धारित करना भले ही आसान है लेकिन इसे लागू करना उतना ही मुश्किल.

ओडिशा में कुल 62 आदिवासी समुदाय हैं, जिनमें से 13 विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह यानि पीवीटीजी हैं. सिर्फ़ किताबें प्रकाशित करने से बात नहीं बनेगी. आदिवासी भाषा या बोली में किताबें उपलब्ध करवा देने भर से इस समस्या का समाधान नहीं होगा. क्योंकि जितनी बड़ी चुनौती आदिवासी भाषाओं में पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाना है, उतनी ही बड़ी चुनौती इन भाषाओं में पढ़ाने वाले अध्यापक उपलब्ध करवाना है.

ख़ासतौर से पीवीटीजी समुदायों में यह चुनौती बहुत बड़ी है. क्योंकि इन समुदायों में पढ़ाई लिखाई का स्तर बहुत कमज़ोर है. इसलिए उनकी भाषा में पढ़ाने वाले अध्यापक मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है.