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माओवाद से प्रभावित दंतेवाड़ा में आदिवासी महिलाएं ढाबा खोल लाखों कमा रही है

Posted on October 2, 2022 - 10:00 am by
  • ढाबा शुरू करने से पुर्व महिलाएं खेती-बाड़ी का काम करती थी
  • प्रशासन ने महिलाओं को एक नए उद्यम में कदम रखने में मदद की

आदिवासी महिलाएं उन रूढियों को तोड़कर घर से निकली है, जिसे हमेशा पुरूष का वर्चस्व माना जाता रहा है। घर के काम और खेती बाड़ी में समय व्यतीत करने वाली आदिवासी महिलाओं ने एक नए क्षेत्र में कदम रखा है, दरअसल, इन आदिवासी महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के माओवाद से प्रभावित दंतेवाड़ा जिलें में अपना एक ढाबा खोला है। ढाबे का नाम मनवा ढाबा रखा है, यानि कि मेरा ढाबा। कम ही समय में ये ढाबा उस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो रही है, इसके बाद महिलाएं टिफिन सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है।

करली गांव में हुई थी मनवा ढाबा की शुरूआत

इस ढाबे की शुरूआत में जिला प्रशासन का महत्वपुर्ण योगदान है। गांव के गौथान पर जिला प्रशासन ने आजीविका निर्माण गतिविधि के रूप में शुरू कराया था, दरअसल मनवा ढाबा की शुरूआत मई में गीदम-बीजापुर सड़क स्थित बड़े करली गांव में हुई थी। गीदम बाजार से छ किलोमीटर दूर 3,000 वर्ग फीट पर मनवा ढाबा बना है। जिला प्रशासन ने इसके लिए जिला खनिज फाउंडेशन की मदद से धन मुहैया कराया था। मनवा ढाबा का संचालन गौथना से जुड़े स्वयं सहायता समुह की 10 महिलाएं करती है। इससे पहले सभी महिलाएं खेती आधारित आजीविका पर आश्रित थी।

मनवा ढाबा में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के खाना परोसा जाता है

यह ढाबा दिन-प्रतिदिन बहुत ही लोकप्रिय होता जा रहा है, यही वजह है कि कभी-कभी प्रतिदिन की आय 20 हजार के आसपास पहुंच जाती है। इस ढाबे अब तक 8 लाख रूपये से अधिक का कारोबार किया है। इस ढाबे में ग्राहकों को मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार के भोजन परोसे जाते है।

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