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आदिवासी देश के मूल मालिक  हैं और उनके अधिकार सबसे पहले आते हैं: राहुल गांधी

Posted on November 16, 2022 - 11:25 am by

आदिवासी देश के मूल मालिक  हैं और उनके अधिकार सबसे पहले आते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा द्वारा बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चारों तरफ से हमला किया जा रहा है. जहां कांग्रेस आदिवासियों के लिए आदिवासी  शब्द का इस्तेमाल करती है.  वहीं भाजपा-आरएसएस उन्हें ‘वनवासी’ कहकर संबोधित करते है. वे कहते हैं कि आप आदिवासी नहीं हैं और आप यहां सबके पहले नहीं रहते थे. उन्होंने नाम बदल दिया है, लेकिन यह कोई छोटी घटना नहीं है, यह गंभीर है. वे उस पर हमला कर रहे हैं जिसके लिए बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया था. उक्त बातें 15 नवंबर को हिंगोली से महाराष्ट्र के वाशिम जिले में पहुंचे राहुल गांधी ने कही. भारत जोड़ो का यह 69वां दिन था. जिसमें यात्रा करते हुए मंगलवार को हिंगोली से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के वाशिम जिले पहुंची थी. जहां आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती पर दोपहर में एक जनसभा को संबोधित किया. रैली में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए.

कांग्रेस ही कर सकती है संविधान की रक्षा

गांधी ने कहा कि भाजपा संविधान पर प्रतिदिन हमला करती है. क्योंकि वह यह स्वीकार नहीं करना चाहती कि दलितों, आदिवासियों और गरीबों को अधिकार मिलने चाहिए.

गांधा ने आगे कहा कि केवल कांग्रेस ही संविधान की रक्षा कर सकती है.  आदिवासियों को शिक्षा दे सकती है और उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा कर सकती है. केरल से लोकसभा सदस्य गांधी ने दो जनसभाओं को संबोधित किया और 2016 की नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से लेकर कृषि ऋण जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा.

बिरसा मुंडा हिन्दूस्तान के लिए शहीद हुए

गांधी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी 24 साल की उम्र में शहीद हो गए. सिर्फ आदिवासियों के लिए नहीं हिंदूस्तान के लिए. अंग्रेजों ने उन्हें जमीन देने की कोशिश की. उनको खरीदने की कोशिश की. भगवान बिरसा मुंडा जी ने कहा, नहीं. मुझे खरीदा नहीं जा सकता. मुझे अपने लोगों को हक दिलवाना है. वहीं भाजपा-आरएसएस के प्रतीक सावरकर हैं. वह दो-तीन साल तक अंडमान में जेल में रहे. उन्होंने दया याचिकाएं लिखनी शुरू कर दीं. सावरकर ने खुद पर एक अलग नाम से एक किताब लिखी और बताया कि वह कितने बहादुर थे. वह अंग्रेजों से पेंशन लेते थे, उनके लिए काम करते थे और कांग्रेस के खिलाफ काम करते थे.

आदिवासी देश के मूल मालिक हैं

आदिवासी ‘‘देश के मूल मालिक” हैं और उनके अधिकार सबसे पहले आते हैं. गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा द्वारा बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चारों तरफ से हमला किया जा रहा है. गांधी ने दावा किया. भाजपा हर रोज संविधान पर हमला करती है क्योंकि वह यह स्वीकार नहीं करना चाहती कि दलितों, आदिवासियों और गरीबों को अधिकार मिलने चाहिए.

उन्होंने कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द का अर्थ क्या है? हिंदुस्तान का ओरिजनल मालिक जो है, वह आदिवासी है। वहीं भाजपा-आरएसएस उन्हें ‘वनवासी’ कहकर संबोधित करते है. वे (भाजपा-आरएसएस) कहते हैं कि आप आदिवासी नहीं हैं और आप यहां सबके पहले नहीं रहते थे. उन्होंने नाम (वनवासी) बदल दिया है, लेकिन यह कोई छोटी घटना नहीं है, यह गंभीर है. वे उस पर हमला कर रहे हैं जिसके लिए बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया था.”

गांधी ने कहा कि कांग्रेस का दृढ़ विश्वास है कि आदिवासी देश के मूल मालिक हैं. उन्होंने कहा, ‘‘देश (जमीन) आपसे लिया गया था.  इसलिए जब यह आपसे लिया गया, तो आपको बदले में कुछ वापस मिलना चाहिए. इसलिए आपको अपना अधिकार, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और देश की संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए. आदिवासी, अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़ा वर्ग कैसे संरक्षित हैं? ये संविधान के माध्यम से हैं.”

सांसद ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान तैयार किया था और कांग्रेस ने भी इस कवायद में योगदान दिया था. गांधी ने दावा किया कि उस समय भाजपा नेताओं ने कहा था कि किसी संविधान की जरूरत नहीं है.

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