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कर्नाटक: आदिवासियों ने मंत्री की घेराव की, अपने घर से निकाले जाने का है डर

Posted on November 2, 2022 - 4:30 pm by

राज्योत्सव के दौरान 1 नवंबर को मंत्री एस.टी. सोमशेखर की घेराव की कोशिश की गई. यह घेराव मैसूर के बाहरी क्षेत्र में रहने वाले एकलव्य नगर के जनजातियों ने किया. ताकि वे अपनी दुर्दशा का ध्यानाकर्षण कर सके.

पिछले 50 दिनों से हक्की पिक्की, डोंबी दासा, शील क्यथा और बुडबुदुके जनजातियों के 100 से अधिक परिवार उपायुक्त कार्यालय के पास डेरा डाले हुए है. उनकी मांग है कि एकलव्यनगर में मकान के लिए हक्कू पत्र या टाइटल डीड दिया जाए.

राज्योत्सव दिवस समारोह के अंत में मैसूरु महल के बलराम गेट के पास  खानाबदोश जनजातियों की भीड़ अचानक से निकल आयी. और श्री सोमशेखर का घेराव करने की कोशिश की. जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे. पुलिस ने मंत्री के चारों ओर एक सुरक्षा बना दिया और कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलने में कामयाब रहे.

उनकी समस्याओं की उपेक्षा करने के लिए सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए. और प्रदर्शनकारी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करने पर मंत्री की आलोचना करते हुए जमीन पर बैठ गए.

हम भी कन्नड़ है, कन्नड़ बोलते-लिखते, पढ़ते हैं

आंदोलन की अगुवाई कर रही दलित संघर्ष समिति (डीएसएस) के चोरनल्ली शिवन्ना कर रही थी. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उनका इरादा कन्नड़ राज्योत्सव दिवस समारोह को बाधित करने का नहीं था.  बल्कि सोमशेखर का घेराव करना था.  जिन्होंने उनकी दुर्दशा से आंखें मूंद ली है. हम पिछले 50 दिनों से उपायुक्त कार्यालय के पास धरने पर बैठे हैं. हमारी भी धैर्य की एक सीमा है. हम भी कन्नड़ हैं. हम कन्नड़ बोलते हैं और कन्नड़ में भी पढ़ते और लिखते हैं.

शिवन्ना के अनुसार उन्होंने सोमशेखर से मिलने के लिए पहले कई प्रयास किए लेकिन कोई फाएदा नहीं हुआ. मंत्री कभी नहीं मिले. उन्होंने आज भी ऐसा ही किया है.

उन्होंने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्री का दायित्व न केवल दशहरा कार्यक्रम आयोजित करना और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण देना है.  बल्कि जिले के गरीब लोगों की समस्याओं को भी हल करना है. 50 दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से पूछताछ करने की जहमत नहीं उठाई. क्या जिला प्रशासन को खुद पर शर्म नहीं आती?

डर है कि घर से बेदखल न कर दिया जाए

महिलाओं और बच्चों सहित प्रदर्शनकारियों को बाद में पुलिस वाहनों में बांधकर ले जाया गया. उन्हें हटाए जाने से पहले शिवन्ना ने कहा कि अगर सरकार ने सकारात्मक रूप से मांगों का जवाब नहीं दिया तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा.

घुमंतू समुदायों को डर है कि उन्हें एकलव्यनगर से बेदखल कर दिया जाएगा. उन्होंने कर्नाटक भू-राजस्व अधिनियम 1964 की धारा 94C के तहत आवेदन आमंत्रित किए जाने के बाद, अकरामा सकारामा योजना के तहत अपने घरों के नियमितीकरण के लिए राज्य सरकार को आवेदन जमा किए थे. लेकिन उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए गए.

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