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बंगाल के ये समुदाय बनना चाहते हैं आदिवासी, संसद में उठा सवाल

Posted on February 8, 2023 - 10:56 am by

पश्चिम बंगाल में 37 समुदाय एसटी सूची में शामिल हैं. इसके अलावा कई ऐसे समुदाय हैं, जो इस सूची में शामिल होने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें शामिल नहीं किया जा रहा है. इस संबंध में बलुरघाट से सांसद डॉ. सुकान्त मजूमदार ने लोकसभा में सवाल किया था कि प. बंगाल से कितने समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने के लिए अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, कोल समुदाय अनुसूचित जनजाति में शामिल है या नहीं, इसके अलावा जनजाति समुदाय के कल्याण हेतु क्या उपाय किए गए है. इस सवाल का जवाब 19 दिसंबर 2022 को केंद्रीय राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने दिया था. जिसमें उन्होने बताया था कि पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल होने के लिए विभिन्न समुदायों के द्वारा शामिल करने के संबंध में अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं. उन्होने आगे कहा कि भारत सरकार ने अनुसूचित जनजाति में शामिल होने के लिए कई विशेष शर्ते निर्धारित की है. उन शर्तों के अनुसार केवल उन प्रस्तावों को आगे किया जा सकता है. जिन्हें राज्य सरकारों ने अनुशंसा की है. इसके बाद कानून में संशोधन करने से पहले भारत के महा पंजीयन और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के द्वारा इसकी सहमति दी जाती है. इन्ही सारी विशेष अनुमोदन के अनुसार कार्य किया जाता है.

बता दें कि प. बंगाल की दार्जलिंग हिल्स, तराई और डूवर्स की 11 गोरखा समुदाय एसटी सूची में शामिल करने की मांग कर रही है. जिसमें भुजेल, गुरुंग, मांगर, नेवार, जोगी, खास, राय, सुनवार, थामी, यक्खा और धीमल आदि समुदाय शामिल है.

कोल समुदाय पश्चिम बंगाल के एसटी सूची में शामिल नहीं

केंद्रीय राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने बताया कि कोल समुदाय को पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. कोल को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने के लिए पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के प्रस्ताव पर भारत के महापंजीयन की टिप्पणियां प्राप्त हुई है, जिन्हे राज्य सरकार को भेज दिया गया है.

जनजातियों के कल्याण हेतु उपाय

केंद्र सरकार ने जनजातियों के विकास और उन्हे मुख्य धारा में लाने के लिए कई नीतियां अपनायी है. टीएसपी के द्वारा जनजातीय विकास और जनजातीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किए जाते है. इसके अलावा एसटीसी में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जलापूर्ति, आजीविका आदि सहायता शामिल किया गया है. जनजातियों क्षेत्रों में बुनियादी विकास के लिए कई कार्यक्रम/योजनाए चलाएं जाते हैं. जैसे आदि आदर्श ग्राम योजना, पीवीटीजी के अस्तित्व, संरक्षण और विकास हेतु कई समर्पित योजनाएं चलाई जा रही है, एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, अनुसंधान से लिए टीआरआई, पूर्वोत्तर क्षेत्र से जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मार्केटिंग और लॉजिस्टिक विकास योजना हाल में ही शुरू हुई है. 

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