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त्रिपुरा और झारखण्ड की जनजाति एक जैसे: डॉ. मिलन रानी जमातिया

Posted on March 21, 2024 - 11:57 am by
त्रिपुरा और झारखण्ड की जनजाति एक जैसे: डॉ. मिलन रानी जमातिया

झारखण्ड के रांची में स्थित टीआरआई में 4 दिवसीय उत्तर-पूर्व राज्यों की संस्कृति व सांस्कृतिक इतिहास पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. संगोष्ठी के दूसरे दिन सिक्किम व त्रिपुरा की संस्कृति और इतिहास पर चर्चा की गयी. टीआरआई के निदेशक रणेंद्र ने इस दौरान कहा कि यह संगोष्ठी अलग-अलग समुदाय के संस्कृति और इतिहास को जान पाने में सहायक होगा.

उन्होंने बताया कि पहला सत्र त्रिपुरा की संस्कृति और इतिहास पर आधारित था. जिसमे त्रिपुरा की संस्कृति पर चर्चा की गयी. संगोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार महादेव टोप्पो ने किया. संगोष्ठी में शामिल त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रो डॉ. लिंकन रियांग मौजूद रही. उन्होंने त्रिपुरा के आदिवासी समुदाय रियांग के सांस्कृतिक जीवन, कृषि जीवन तथा उनके परंपराओं पर जानकारी दी.

त्रिपुरा यूनिवर्सिटी में कार्यरत हिंदी विभाग कि सहायक प्रो डॉ. मिलन रानी जमातिया ने त्रिपुरा के जमातिया जनजाति के बारे में बताया. उन्होंने जमातिया झारखण्ड की संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि जमातिया जनजाति की सामाजिक व्यवस्था झारखंड के आदिवासी समुदाय से मिलती जुलती है. ये लोग भी पहाड़, नदी और जंगल की पूजा करते हैं.

वहीं प्रो विकास रॉय देववर्मा ने लुप्त हो रही आदिवासी भाषा कोकबोरोक के के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि शिक्षण में प्रयोग नहीं होने के कारण कोकबोरोक विलुप्त होने के कगार पर है. दूसरा सत्र सिक्किम की संस्कृति व इतिहास पर आधारित रहा. सिक्किम विवि की सहायक प्रो डॉ. रिचवेन ओमंगू लेप्चा ने सिक्किम के लेप्चा आदिवासी समुदाय के लोकजीवन, खानपान, परंपराओं और सांस्कृतिक उत्सवों के बारे में जानकारी को साझा किया.

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