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त्रिपुरा चुनाव: 3 बजे तक 69 फीसदी वोट, दो साल पुरानी टिपरा मोथा पार्टी कैसे दे रही बीजेपी को टक्कर

Posted on February 16, 2023 - 4:32 pm by

चुनाव अधिकारियों के अनुसार अपराह्न 3 बजे तक राज्य में मतदान प्रतिशत 69.96% हो गया है. हालांकि, कई मतदाता ऐसे हैं जो अभी भी मतदान के आखिरी घंटे के दौरान कई मतदान केंद्रों पर लाइनों में इंतजार कर रहे हैं. नतीजतन, अधिकारी अंतिम मतदान प्रतिशत 85% से अधिक होने की उम्मीद है.

मुख्य पार्टियों के उम्मीदवारों का गणित

बीजेपी 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, एक सीट पर दोस्ताना मुकाबला होगा. वहीं माकपा 47 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और टिपरा मोथा ने 42 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. तृणमूल कांग्रेस ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि 58 निर्दलीय उम्मीदवार हैं.

वोटरों की स्थिति

चुनाव आयोग के अनुसार, त्रिपुरा में इस साल 28.14 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया. इनमें 14,15,233 पुरुष, 13,99,289 महिलाएं और 62 ट्रांसजेंडर हैं. 94,815 मतदाता 18-19 आयु वर्ग के हैं जबकि 6,21,505 22-29 आयु वर्ग के हैं.

चुनाव आयोग ने कांग्रेस, बीजेपी को भेजा नोटिस

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने त्रिपुरा कांग्रेस और बीजेपी को नोटिस भेजा है. दोनों दलों ने आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद अपने आधिकारिक हैंडल से अपने पक्ष में वोट की अपील की है.

टिपरा मोथा का कहां पर असर

त्रिपुरा में पिछली बार बीजेपी ने लेफ्ट के लाल गढ़ को धराशायी कर दिया था. लेकिन इस बार बहुकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं. एक तरफ बीजेपी और आईपीएफटी (इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया) अलायंस है तो दूसरी ओर कांग्रेस-सीपीएम का गठबंधन. इस टक्कर को त्रिकोणीय बना रही है टिपरा मोथा. सियासी तौर पर अहम त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद पर टिपरा मोथा का कब्जा है. पार्टी राज्य की 60 में से 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जिला परिषद में 22 विधानसभा सीटें हैं. ये ऐसे इलाके हैं, जहां आदिवासी समुदाय प्रभावी है. त्रिपुरा की 40 लाख से ज्यादा की आबादी में इनकी हिस्सेदारी एक तिहाई है. राज्य में आदिवासी समाज की आबादी 35 प्रतिशत है.

2018 चुनाव में हुआ था उलटफेर

सीपीएम ने तीस साल से ज्यादा वक्त तक त्रिपुरा पर राज किया. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में 49 सीटों पर जीत के साथ सीपीएम का वोट शेयर 48.11 प्रतिशत था. वहीं बीजेपी को सिर्फ 1.54 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबको चौंका दिया. पार्टी ने 42 प्रतिशत वोटों की छलांग लगाई. 60 में से 35 सीटों पर जीत के साथ त्रिपुरा में भी पहली बार कमल खिल गया। वहीं उसकी सहयोगी आईपीएफटी को भी आठ सीटें हासिल हुई थीं. बीजेपी ने 51 सीटों पर चुनाव लड़कर 43.59 फीसदी वोट हासिल किए थे. वहीं सत्ता से दूर हुई सीपीएम ने 57 सीटों पर चुनाव लड़कर 42.22 प्रतिशत वोट हासिल किए. सीपीएम ने पिछले चुनाव में 16 सीटें जीती थीं. लोकतंत्र के उत्सव में जनता ही ईश्वर होती है.

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