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त्रिपुरा चुनाव: आदिवासी मुख्यमंत्री के सवाल पर क्यों ख़ामोश हो गए सीताराम

Posted on January 12, 2023 - 1:06 pm by

त्रिपुरा में चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है, फरवरी या मार्च 2023 में चुनाव में चुनाव होने की संभावना है. इसको देखते हुए त्रिपुरा में पिछले विधान सभा चुनाव में लगातार 25 तक सत्ता में रहने के बाद बेदख़ल हुई सीपीआई (एम) ने कहा है कि वो आने वाले विधान सभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए प्रतिबद्ध है.

त्रिपुरा में सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी और राज्य सचिव जितेन्द्र चौधरी ने राज्य कमेटी बैठक के बाद कहा कि वो बीजेपी को हराने के लिए सभी दलों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिद्धांत: यह फ़ैसला ले लिया है कि वह बीजेपी को राज्य की सत्ता से बेदख़ल करने के लिए कांग्रेस और आदिवासियों के संगठन टिपरा मोथा से बातचीत करेगी.

क्या त्रिपुरा के मुख्यमंत्री आदिवासी होंगे

संवाददाता सम्मेलन में सीताराम येचुरी से पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी एक आदिवासी को त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बना सकती है?. इस पर उनका जवाब था, ”अभी इस मसले पर पार्टी के भीतर चर्चा नहीं हुई है. पिछले चुनाव में भाजपा आदिवासियों के बल पर ही सत्ता में आई थी. लेकिन उन्होंने आदिवासियों के साथ धोखा किया है. इसलिए यह ज़रूरी है कि पहले बीजेपी को हटाया जाए.”

त्रिपुरा सीपीएम के राज्य वर्तमान राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी आदिवासी समुदाय से ही हैं. जितेंद्र चौधरी राज्य के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ माने जाते हैं. वे राज्य में मंत्री रहने के अलावा लोकसभा के सदस्य भी थे.

सीपीएम 25 सालों से सत्ता में थी

वर्ष 2018 के चुनाव से पहले त्रिपुरा में सीपीएम पार्टी ने लगातार 25 साल तक सरकार चलाई थी. लेकिन 2018 के चुनाव में त्रिपुरा में इंडिजिनियस पिपुल्स फ़्रंट ऑफ़ त्रिपुरा  (IPFT) ने अलग टिपरालैंड की माँग उठाई. इस माँग के साथ आदिवासी नेता और संगठन दोनों बीजेपी के क़रीब आ गए. वर्ष 2018 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी के साथ IPFT का गठबंधन हुआ. इस गठबंधन ने राज्य में शानदार जीत हासिल की थी.

अब त्रिपुरा में फिर से विधान सभा चुनाव होने है. लेकिन राज्य के राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह से बदल चुके हैं. अब IPFT बिखर चुका है. प्रद्योत किशोर माणिक्य के नेतृत्व में टिपरा नामक एक और आदिवासी संगठन का उदय हुआ है. माणिक्य त्रिपुरा के राज परिवार से है.

त्रिपुरा मोथा फिलहला राज्य की राजनीति में सबसे मुखर राजनीतिक दल नज़र आ रहा है. विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में इस दल का आधार बहुत मज़बूत है.

बता दें कि त्रिपुरा में 20 सीटें आदिवासियों के लिए रिज़र्व हैं. ज़ाहिर है कि 60 सदस्यों की विधान सभा में 20 सीटें एक बड़ी संख्या है. सीपीआई (एम) के लिए सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी इलाक़ों में अपना खोया आधार पाने की है.

अगर टिपरा मोथा, कांग्रेस और सीपीआईएम चुनाव से पहले अगर साथ आते हैं तो फिर सत्ताधारी बीजेपी के लिए रास्ता बेहद कठिन हो सकता है. लेकिन राह आसान नहीं है.

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