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त्रिपुरा: लगभग 50 फीसदी विस्थापित मिजोरम आदिवासी मतदाताओं ने त्रिपुरा में नामांकन किया

Posted on November 9, 2022 - 5:01 pm by

त्रिपुरा के मुख्य चुनाव अधिकारी गिट्टे किरणकुमार दिनकरराव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चूंकि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव नजदीक है.  हम चाहते हैं कि अगले महीने तक रियांग मतदाताओं का 100 प्रतिशत नामांकन हो.  लेकिन उन्हें प्रस्तावित क्षेत्रों में बसना होगा, जहां समझौता प्रक्रिया चल रही है. उनके निपटारे के बाद  ही नाम विभिन्न दस्तावेज जारी किए जाएंगे. हमने रियांग आदिवासियों से जल्द से जल्द अपने बस्ती शिविरों में आने का आग्रह किया.

त्रिपुरा में जातीय हिंसा के कारण 25 साल पहले मिजोरम से त्रिपुरा विस्थापित थे. उनमें से 21,703 पात्र मतदाताओं में से लगभग 50 प्रतिशत को त्रिपुरा में मतदाता सूची में जोड़ा गया है. ये मतदाता 37,136 विस्थापित रियांग जनजातियों का हिस्सा हैं, जो मिजोरम से चले गए और 1997 से उत्तरी त्रिपुरा में सात शरणार्थी शिविरों में शरण लिए हुए हैं.

त्रिपुरा के राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र, त्रिपुरा और मिजोरम सरकारों और रियांग आदिवासी नेताओं के बीच जनवरी 2020 में हस्ताक्षरित समझौते हुआ था. उसके अनुसार  त्रिपुरा के चार जिलों में 12 स्थानों पर 6,959 परिवारों वाले 37,130 से अधिक विस्थापित रियांग जनजातियों का उत्तरी त्रिपुरा, धलाई, गोमती और दक्षिण त्रिपुरा पुनर्वास किया जा रहा है.

इन विस्थापित रियांग आदिवासियों के पुनर्वास का लक्ष्य 31 अगस्त तक होना था. लेकिन कई भूमि संबंधी मुद्दों,  वन भूमि की मंजूरी,  ताजा परेशानी,  पुनर्वास के खिलाफ आंदोलन की धमकी और कई अन्य मुद्दों के कारण  नहीं किया जा सका.

 मिजोरम चुनाव विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि त्रिपुरा चुनाव विभाग से बात करने के बाद  हजारों रियांग मतदाताओं के नाम मिजोरम में नौ विधानसभा क्षेत्रों की चुनावी सूची से हटा दिए गए हैं.

त्रिपुरा के आदिवासी कल्याण विभाग के अधिकारियों ने यह भी कहा कि विस्थापित रियांग आदिवासियों के संबंध में जटिल नामांकन प्रक्रिया के कारण, त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद में ग्राम समितियों के चुनाव में देरी हो रही है.

एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए  त्रिपुरा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरिंदम लोध ने हाल ही में राज्य चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने और याचिकाकर्ताओं की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए कानून के अनुसार ग्राम समिति के चुनाव कराने का निर्देश दिया था.

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