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त्रिपुरा: टिपरा पार्टी भूमिहीन आदिवासियों को भूमि देने को लेकर चुनाव के मैदान में

Posted on November 14, 2022 - 5:37 pm by

त्रिपुरा में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं. जो की अब चार महीने से भी कम समय रह गया है. ऐसे में त्रिपुरा के शाही वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मन के नेतृत्व में क्षेत्रीय पार्टी टिपरा (TIPRA)  ने 12 अक्टूबर को अगरतला में एक विशाल रैली की. इस दौरान टिपरा नेता ने सत्ता में आने पर राज्य में हर भूमिहीन आदिवासी को भूमि देने का वादा किया.

टिपरा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन द्वारा आयोजित रैली हाल के दिनों में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा आयोजिक किसी भी रैली से कहीं अधिक बड़ी थी. रैली में पूर्व भारतीय फुटबॉलर और सिक्किम की हमरो सिक्किम पार्टी के प्रमुख बाइचुंग भूटिया भी मौजूद थे.

वहीं टीआईपीआरए के इस वादे पर कटाक्ष करते हुए, बीजेपी के जनजाति मोर्चा के महासचिव देवीद देबबर्मा ने कहा: “आज शाही वंशज भूमि पट्टे के बारे में बात कर रहे हैं, न कि ग्रेटर टिपरालैंड के बारे में.. तो क्या वे अपनी प्रमुख मांग से पीछे हट रहे हैं?”

आदिवासी इलाकों में टीआईपीआरए की मजबूत पकड़ होने के चलते बीजेपी पहले से ही राज्य में खुद को एक मुश्किल स्थिति में पाती है. त्रिपुरा विधानसभा की 60 सीटों में से 20 आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं जहां टिपरा के जीत की संभावना बहुत ज्यादा है.

हालांकि, रैली को संबोधित करते हुए देबबर्मन ने जनजातीय समुदायों के विकास के लिए राष्ट्रीय दलों पर हमला किया. देबबर्मन ने कहा, “जब तक ग्रेटर टिप्रालैंड की हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे.”

दरअसल, त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में स्वदेशी लोगों के लिए प्रस्तावित राज्य को टिपरालैंड नाम दिया गया है. इन मूल निवासियों की मांग है कि त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद और आसपास के कुछ क्षेत्रों को एक अलग राज्य में परिवर्तित किया जाए.

बीजेपी पर हमला करते हुए टिपरा प्रमुख ने आरोप लगाया कि पार्टी ओछी राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा, “मैं (नरेंद्र) मोदी जी जैसा बड़ा व्यक्ति नहीं हूं. वे यहां आएंगे और 5 हज़ार करोड़ रुपये देने का वादा करेंगे. लेकिन अगर हम सत्ता में आए तो हम सभी को जमीन का पट्टा आवंटित करेंगे.”

पट्टा भूमि राजस्व छूट के साथ सरकार द्वारा अनुमोदित कृषक को दी गई कृषि भूमि है.

टिपरा प्रमुख ने आगे कहा, “हम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं. हम हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों और बौद्धों के साथ समान व्यवहार करते हैं.

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