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यूजीसी उच्च शिक्षा की किताबों को आदिवासी भाषाओं में करेगा अनुवाद

Posted on December 26, 2022 - 11:35 am by

शिक्षा मानव के जीवन में काफी बदलाव लाता है. इस प्रकार हमारा ध्यान सुनिश्चित करना है कि शिक्षा आदिवासियों तक पहुंचे. जब उनकी भाषा औपचारिक होगी तो उन्हे इसका लाभ मिलेगा. ऐसे में उनकी भाषा में किताबों को अनुवाद किया जाएगा. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उनका भारतीय भाषाओं में इसका अनुवाद करवाएगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देती है. जिसका फाएदा आदिवासी समुदायों को भी मिलेगा. उक्त बातें केंद्रीय शिक्षा मंत्री महेंद्र प्रधान ने एक संवाददाता सम्मेलन में कही थी.

केंद्र सरकार आदिवासी भाषाओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल में कहा था कि उच्च शिक्षा के ले किताबें अन्य 12 भाषाओं के साथ आदिवासी भाषाओं में भी उपलब्ध होगी.

स्कूली शिक्षा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के प्रथम वर्ष की किताबें आदिवासी भाषाओं में उपलब्ध कराने का काम तेजी से चल रहा है.

केंद्रीय मंत्री के अनुसार स्थानीय भाषाओं और मातृभाषा में शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रमुख स्तंभों में से एक है और पीएम मोदी देश की आदिवासी आबादी को लंबे समय से संम्मान दे रही है.

संयुक्त राष्ट्र ने आदिवासी भाषाओं का दशक घोषित किया

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने भी वर्ष 2022 से लेकर 2032 तक को आदिवासी भाषाओं के अंतर्राष्ट्रीय दशक के रूप में घोषित किया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष कसाबा कोरोसी का कहना है कि आदिवासी भाषाओं को सहेज कर रखना न सिर्फ इन समुदायों (आदिवासियों) के लिए अहम है. बल्कि सारी मानवता के लिए भी अहम है. हर लुप्त होनेवाली भाषा के साथ उससे जुड़ा विचार, संस्कृति परंपरा और ज्ञान भी खो जाता है. उन्होने कहा था कि हर दो सप्ताह में एक आदिवासी भाषा मर जाती है.   

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