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इंडोनेशिया: इलेक्ट्रिक कार बैटरी के लिए अनकॉन्टेक्टेड जनजातियों को किया जा रहा खत्म

Posted on April 5, 2023 - 1:03 pm by

एक बड़े इंडोनेशियाई परियोजना में अनकॉन्टेक्टेड जनजातियों को सफाया किया जा सकता है. परियोजना में इलेक्ट्रिक कार बैटरी के लिए निकेल(Nickel) का उत्पादन किया जा रहा है.

बता दें कि इंडोनेशिया के हलमहेरा द्वीप पर इलेक्ट्रिक कार बैटरी के लिए बड़ा उत्पादक देश बनने के लिए इंडोनेशिया की योजना है. इस योजना में टेस्ला और दूसरी कंपनियां अरबो डॉलर खर्च कर रही है.

निकेल माइनिंग के लिए हलमहेरा के आंतरिक जंगलों के बड़े क्षेत्रों को हटाया जाएगा. इन जंगलों में होंगाना मान्यावा जनजाति के 300-500 संपर्क रहित(अनकॉटेक्टेड) आदिवासी रहते हैं. अगर इन क्षेत्रों में खनन किया जाएगा, तो ये आदिवासी खत्म होने से नहीं बच पाएंगे.

होंगाना मान्यावा लोगों की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 3,000 है, जिनमें से अनुमानित 300-500 से संपर्क नहीं हो पाया है, और हलमहेरा द्वीप के जंगलों में रहते हैं.

होंगाना मान्यावा का अर्थ ‘जंगल के लोग’ होता है. होंगाना मान्यावा जनजाति इंडोनेशिया में अंतिम खानाबदोश शिकारी-संग्रहकर्ता (Hunter-Gathers) जनजातियों में से एक हैं. उन्हें अपनी जमीन और अपने जीवन के खतरे को भी सामना करना पड़ेगा. हज़ारों मील दूर लोगों के द्वारा उनके जीवन शैली को निगम (कोर्पोरेशन) द्वारा हड़बड़ी में नष्ट कर दिया गया.

खनन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध है क्योंकि संपर्क रहित(अनकॉटेक्टेड) जनजातियां अपनी भूमि के शोषण के लिए अपनी स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति नहीं दे सकती हैं. जो कि स्वदेशी क्षेत्रों पर सभी ‘विकास’ के लिए कानूनी रूप से जरूरी होता है.

इसके बावजूद Weda Bay Nickel (WBN) कंपनी को खनन के लिए छुट मिली हुई है. यह कंपनी आंशिक रूप से फ्रांसीसी खनन कंपनी Eramet के स्वामित्व वाला एक संयुक्त उद्यम है. दरअसल यह क्षेत्र वही है, जिस क्षेत्र में होंगाना मान्यावा जनजाति रहते हैं.

यह जानते हुए भी कि जिन क्षेत्रों में होंगाना मान्यावा रहते हैं, उस कंपनी को छुट मिली हुई है. वर्ष 2019 में WBN ने उस क्षेत्र में खनन करना शुरू किया. तब से ही होंगाना मान्यावा का क्षेत्र तबाह हो चुका है. कंपनी की योजना खनन को उसकी मौजूदा दर से कई गुना बढ़ाने और 50 साल तक काम करने की है.

सर्वाइवल इंटरनेशनल को पता चला है कि एक बड़े जर्मन रासायनिक बीएएसएफ कंपनी हलमहेरा में एक रिफाइनरी बनाने के लिए एरामेट के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है. इसके लिए एक संभावित स्थान अनकॉटेक्टेड होंगाना मान्यावा क्षेत्र में होगा.

एक हाल ही में संपर्क की गई होंगाना मान्यावा महिला कहती है कि, “वे हमारे पानी को ज़हरीला बना रहे हैं और हमें ऐसा महसूस करा रहे हैं कि हम धीरे-धीरे मारे जा रहे हैं.”

एक अन्य ने कहा: “मैं उन्हें इसे लेने की सहमति नहीं देता. उन्हें बता दें कि हम अपना जंगल नहीं देना चाहते.”

सर्वाइवल इंटरनेशनल के निदेशक कैरोलिन पियर्स ने कहा, “यह भयावह है कि इलेक्ट्रिक कार कंपनियां ग्राहकों को ‘नैतिक खपत’ का वादा के नाम पर बेचती हैं, जबकि उनकी आपूर्ति श्रृंखला एक अनकॉन्टेक्टेड जनजाति को नष्ट कर देती है. होंगाना मान्यावा के वर्षा वाले जंगल में कचरा डालने के बारे में ‘जलवायु-अनुकूल’ कुछ भी नहीं है और आदिवासियों के मौत का कारण बनने के बारे में कुछ भी ‘टिकाऊ’ नहीं है जो आत्मनिर्भर रूप से रह रहे हैं.

साभार : Survival International

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