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आदिवासियों की घटती जनसंख्या पर केंद्रीय मंत्री ने क्या दिया जवाब?

Posted on September 28, 2022 - 7:37 am by

विजय उरांव

देश में जनसंख्या बढ़ने का कारण गरीबी और कम पढ़ा लिखा होना बताया जाता है। समझ आता है लेकिन आदिवासियों के जनसंख्या न बढ़ने व घटने के कारण को लेकर जनजातीय कार्य राज्यमंत्री रेणुका सिंह सरूता का कहना है कि अनुसूचित जनजातियों में कुछ समुदाय है जिनकी जनसंख्या घटती हुई अथवा स्थिर है, बहुत ही कम साक्षर है, प्रौद्योगिकी कृषि (पूर्व स्तर की), आर्थिक रूप से पिछड़े हुए है। ये समुह हमारे समाज के सबसे कमजोर वर्ग के है क्योंकि वे संख्या में बहुत कम है और उन्होंने सामाजिक और आर्थिक विकास का कोई महत्वपुर्ण स्थान प्राप्त नही किया है तथा सामान्यत: वे खराब अवसंरचना  और प्रशासनिक सहायता वाले दूरवर्ती क्षेत्रों में रहते है। 17 राज्यों और एक संघ राज्यक्षेत्र में 75 ऐसे समुहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुहों के रूप में चिंहित तथा श्रेणीबद्ध किया गया है। दरअसल एक सवाल केरल अलाथुर से सांसद (कांग्रेस) कुमारी राम्या हरिदास ने  वर्ष 2020 में लोकसभा के अतारांकित प्रश्न AU1352 में पुछा था कि ऐसे जनजातीय समुदायों की जनसंख्या कितनी है जिनकी जनसंख्या में निरंतर कमी आ रही है। लोकसभा में दिए जवाब में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने कहा कि आदिवासियों के जनसंख्या स्थिर रहने या घटने का कारण उनका गरीबी होना या कम पढ़ा लिखा होना है।

ऐसे समुदायों के अस्तित्व के संरक्षण के सवाल पर सरकार ने नागरिक अधिकारों की संरक्षण अधिनियम, 1955 (1955 का 22) और अनुसूचित जाति तथा जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (1989 का 33) जैसे कानूनों का हवाला दिया है। अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए इस मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही अन्य स्कीमों के अलावा, यह मंत्रालय विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के समय विकास के लिए विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुहों का विकास, नामक एक केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम, अनन्य रूप से काम कर रहा है। इस स्कीम के तहत राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता के आधार पर संरक्षण सह विकास योजनाएं प्रस्तुत करती है। यह स्कीम अत्यंत लचीली है क्योंकि यह प्रत्येक राज्य को उन क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए सक्षम बनाती है, जिन्हें वे पीवीटीजी और उनकी पहचान तथा संस्कृति सहित उनके सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश के लिए संगत मानते है। इस स्कीम के प्रावधानों के अनुसार राज्यों के लिए 100 फीसदी सहायता अनुदान उपलब्ध कराये जाते है।

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