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यूपीः योगी सरकार से इस फैसले से बर्बाद हो जाएंगे यूपी के आदिवासी

Posted on March 15, 2023 - 1:25 pm by

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक फैसला लिया है जिसमें एससी-एसटी की जमीन खरीदने के लिए डीएम की अनुमति नहीं लेनी होगी. योगी सरकार के इस फैसले के बाद से यूपी के आदिवासी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे.

दरअसल योगी सरकार उत्तर प्रदेश में शहर के लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कई नियमों में संशोधन करने जा रही है. जिसमें दलितों और आदिवासियों की जमीन लेने के लिए अब डीएम की अनुमति की अनिवार्यता नहीं रहेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार 12 एकड़ में टाउनशिप बसाने की अनुमति सरकार देने जा रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष यूपी टाउनशिप नीति 2023 प्रस्ताव रखा गया. सरकार के द्वारा टाउनशिप बसाने वालों को जमीन की रजिस्ट्री पर 50 फीसदी छूट दी जाएगी.

प्रस्तावित नीति में दो लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 12.5 एकड़ जमीन और अन्य शहरों में 25 एकड़ जमीन पर कालोनियां बसाने की अनुमति दी जाएगी.

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 50 एकड़ में बहुउद्देशीय स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बनेगा. शहर में स्पोर्ट्स सिटी, फिल्म सिटी, आईटी सिटी, मेडिसिटी, एजुकेशनल हब बनेगा.

आदिवासियों की जमीन खरीद के लिए DM की अनुमति की जरूरत क्यों पड़ती है

आदिवासियों के संबंधित संपत्ति की बिक्री, दान और विरासत पर कई सीमाएं है, इस तरह की व्यापक सीमाओं का उद्देश्य न केवल आदिवासियों के हितों की रक्षा करना है, इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना है कि गैर आदिवासी के द्वारा आदिवासियों का शोषण न करें.

हालांकि, डीएम या कलेक्टर के माध्यम से आदिवासियों की जमीन खरीदी जा सकती है, लेकिन उसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

संशोधन के बाद आदिवासियों के जीवन पर प्रभाव

जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 11.34 लाख है, जो कि कुल आबादी का 0.6 फीसदी है. जिसमें 88 फीसदी आबादी गांवों में बसती है. अब तक पांच आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया है. इसके अलावा कई जनजातियों को शामिल करने का प्रस्ताव है. उत्तर प्रदेश के विधान सभा में 2 सीट आरक्षित है. उत्तर प्रदेश में आदिवासियों की स्थिति बेहद ही दयनीय स्थिति में है. कई जिलों में आदिवासियों की आबादी कम होने के कारम पहले से ही कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है.

उत्तर प्रदेश में आदिवासियों की जमीन सुरक्षा से संबंधित कानून छिन लिए जाने से उन पर अधिक अत्याचार बढ़ने की आशंका है. इतने बड़े क्षेत्र और आबादी में कम आबादी वाले आदिवासियों के ऊपर होने वाले अपराध में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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