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आदिवासियों के फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने के सवाल पर केंद्र सरकार ने क्या कहा?

Posted on February 7, 2023 - 4:43 pm by

अप्रैल 2022 में कर्नाटक में फर्जी अनुसूचित जनजाति/जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले सामने आये थे. जिसमें सबसे अधिक कलबुर्गी, उत्तर कन्नड़ और बिदर जिले से थे. फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर 111 तहसीलदार, 108 रेवेन्यु इंसपेक्टर और 107 ग्रामीण शाखाओं पर F.I.R किए गए थे. NCST के रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2021 में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनाने की 35 हजार शिकायत मिली थी.

इसी से संबंधित सवाल महाराष्ट्र के रावेर से लोकसभा सांसद रक्षा निखिल खाडसे में जनजाति कार्य मंत्रालय से पूछा था कि विशेष रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात राज्यों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजातियों के फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं उनकी कितनी जानकारी है. और इसके अलावा इनको रोकने के लिए सरकार के द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे है. उन्होने यह भी पूछा था कि क्या सरकार इसके लिए कोई अलग से कानून भी बना रही है.

जनवरी माह में गुजरात से गैर आदिवासियों ने ST फर्जी प्रमाण पत्र वितरण किए जाने जैसे सवाल गुजरात के आदिवासी नेता छोटूभाई वसावा ने उठाये थे. देशभर में इस तरह के मामले देखने को मिलते हैं, जहां गैर आदिवासियों के द्वारा फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर नौकरी करने का मामला प्रकाश में आता रहा है.

जनजाति कार्य राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने इससे संबंधित कोई ब्यौरा नही दिया. उन्होने कहा कि जनजाति कार्य मंत्रालय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति के रूप में किसी समुदाय की सूचना के लिए नोडल मंत्रालय है. हालांकि, अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र/सामाजिक स्थिति जारी करने और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार और संघ राज्य प्रशासन का होता है. इसके संबंध में प्राप्त सभी शिकायतों को संबंधित राज्य/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन को अग्रेषित किया जाता है.

आगे बताया कि मंत्रालय उचित सत्यापन के साथ अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में समय-समय पर परामर्शी जारी करता है. और यह सुनिश्चित करता है कि योग्य अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को बिना किसी देरी और कठिनाईयों के प्रमाण पत्र जारी किए जाएं.

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आदिवासियों के फर्जी प्रमाण पत्र के संबंध में सारा ठीकरा राज्य सरकारों पर फोड़ दिया है. मंत्रालय के पास फर्जी एसटी प्रमाण संबंधी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसलिए इससे संबंधित फर्जी एसटी प्रमाण पत्र रोकने के लिए कोई उपाय नहीं है और न ही इससे संबंधित कोई कानून बनाने वाली है.

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