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भारत में कमजोर आदिवासियों के लिए क्या कर रही है केंद्र सरकार

Posted on February 24, 2023 - 12:24 pm by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

जनजातीय समुदायों की पहचान अक्सर कुछ विशिष्ट लक्षणों जैसे कि आदिम लक्षण, विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव, बड़े समुदाय से संपर्क करने में शर्म और पिछड़ेपन से होती है. इनके साथ-साथ कुछ जनजातीय समूहों की कुछ विशिष्ट विशेषताएँ भी हैं जैसे शिकार पर निर्भरता, भोजन के लिए संग्रह करना, प्रौद्योगिकी का पूर्व-कृषि स्तर होना, जनसंख्या में शून्य या नकारात्मक वृद्धि और साक्षरता का अत्यंत निम्न स्तर होना आदि है. इन समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह कहा जाता है.

जनजातीय समूहों के बीच पीवीटीजी अधिक असुरक्षित हैं. इसके कारण, अधिक विकसित और मुखर जनजातीय समूह जनजातीय विकास निधि का एक बड़ा हिस्सा लेते हैं, जिसके कारण पीवीटीजी को उनके विकास के लिए अधिक धन की आवश्यकता होती है.

पश्चिमी दिल्ली से सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने जनजातीय कार्य मंत्रालय से पूछा था कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की श्रेणी में नए जनजातीय समूहों को शामिल किया गया, इसके अलावा PVTGs के लोगों की जमीन छिन गई, क्या विकासात्मक उद्देश्य से विस्थापित किया गया है. इनके लिए सरकार कोई योजना चला रही है?

कब कितने पीवीटीजी को शामिल किया गया

इस पर जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू ने जवाब मे बताया कि साल 1975 में सबसे कमजोर जनजातीय समूह के नाते आदिम जनजातीय समूह(पीटीजी) के रूप में 52 समूहों की पहचान की गई थी और साल 1993 में 23 और समूहों को आदिम जनजाति समूह श्रेणी में जोड़ा गया, जिससे कुल संख्या 75 हो गई.

उन्होने आगे बताया कि साल 2006 में पीटीजी का नाम बदलकर विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह कर दिया गया. और साल 1993 के बाद से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह श्रेणी में नए जनजातीय समूहों को नहीं जोड़ा गया है.

मंत्रालय ने बताया कि जमीन अधिग्रहण से संबंधित विधायी और प्रशासन राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसलिए इससे संबंधित डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखे जाते हैं. एफआरए 2006 का जिक्र करते हे कहा कि धारा 4(5) के अनुसार वन में निवास करने वाली अनुसूचुत जनजाति या अन्य परंपरागत वन निवासियों का कोई सदस्य उसके कब्जे वाली वन भूमि से तब तक बेदखल नहीं कर सकती है, जब तक कि मान्यता और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती.

विशेष रूप से कमजोर जनजातियों के लिए कार्य

पहचान किए गए 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातियों के लिए सरकार संस्कृति और पारंपरिक प्रथाओं के संरक्षण या किसी अन्य नवीन गतिविधि के संबंध में उनके प्रस्ताव के आधार पर निधियां दी जाती है. इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत विशेष अनुदान जनजातीय और उनके क्षेत्रों के विकास के लिए दी जाती है. मंत्रालय कक्षा 6वीं से 12वीं तक अनुसूचित जनजातियों के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय स्थापित कर रहा है, जिसमें पीवीटीजी वर्ग के लिए 5 फीसदी सीटें आरक्षित है.

एफआरए 2006 की धारा 3(1)(च) आदिम जनजाति समूहों को आवास और निवास के अधिकारों सहित वन अधिकारों की मान्यता प्रदान करती है. नेशनल फेलोशिप योजना के तहत 750 के स्लॉट में PVTGs के छात्रों के लिए 25 सीट आरक्षित है. वहीं नेशनल ओवरसीज छात्रवृति के तहत में 20 स्लॉट में से 3 स्लॉट पीवीटीजी उम्मीदवारो के लिए आरक्षित है.

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