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अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह रह रहे ब्रू समुदाय के लोगों के क्या हैं हालात..

Posted on December 20, 2022 - 4:29 pm by

विजय उरांव

ब्रू समुदाय बीस साल से अधिक समय से अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह त्रिपुरा में रह रहे हैं. उन्हे सरकार की तरफ से लगातार बसाने की कोशिश की जा रही है. उनसे संबंधित सवाल असम के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने 19 दिसंबर 2022 को तारांकित सवाल 1809 में जनजातीय मंत्रालय से पुछा था. जिसमें उन्होंने पुछा था कि त्रिपुरा में वर्तमान में ब्रू समुदाय की आबादी कितनी है. उनकी वर्तमान स्थिति, पुनर्वास की समय सीमा, पुनर्स्थापित लोगों की संख्या कितनी है और लंबित मामले कितने है. पुनर्वास की प्रक्रिया, सुविधाएं, कल्याणकारी उपाय क्या है. इसके साथ 661 करोड़ रू पैकेज का ब्यौरा, चिन्हित स्थायी पुनर्वास की संख्या तथा मुलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल थे. इसके अलावा उनके रोजगार संबंधी सवाल किए गए थे.

ब्रू समुदाय के संघर्ष का इतिहास

मिजोरम में साल 1995 में ब्रू समुदाय के द्वारा स्वायत्त जिले की मांग को लेकर मिजो और ब्रू समुदाय के बीच झड़प हुई थी. इसमें यंग मिज़ो एसोसिएशन तथा मिज़ों स्टूडेंट्स एसोसिशन ने ब्रू समुदाय को बाहरी घोषित कर दिया था. और ब्रू समुदाय को मतदाता सूची से हटाने की मांग की थी.

इसके बाद ब्रू समुदाय समर्थित उग्रवादी समुह ब्रू नेशनल लिब्ररेसन फ्रंट (Bru Liberation Front) तथा राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल युनियन(Bru National Union) के नेतृत्व में साल 1996 में मिजो समुदायों के समुह से खुनी संघर्ष हुआ था. जिसके बाद 37 हजार ब्रू समुदाय के लोगों को मिजोरम छोड़ना पड़ा था और त्रिपुरा की शरण में रह रहे थे.

इसके बाद ब्रू समुदाय के लोगों को मिजोरम भेजने की कोशिश भी हुई, साल 2018 में ब्रू नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और त्रिपुरा-मिजोरम से समझौता हुआ था. जिसमें जमीन और आर्थिक मदद की बात हुई थी. इसमें 5 हजार लोग वापस जाने को तैयार हुए थे. लेकिन बाकी 32 हजार लोगों ने यह कहते हुए लौटने से मना कर दिया था कि वहां उनकी सुरक्षा नहीं हो सकती है. उन्होने त्रिपुरा में ही बसाने की मांग की थी.

असम के हैलाकांडी में 12 दिसंबर 2022 को ब्रू उग्रवादी संगठन युनाइटेड डेमोक्रेटिक लिबरेशन फ्रंट ऑफ बराक वैली और ब्रू रिवोल्यूशनरी आर्मी ऑफ यूनियन के 1179 लोगों ने आत्मसमर्पन किया था.  

आधे परिवारों को बसा दिया गया है

जवाब में जनजातीय केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने कहा कि गृह मंत्रालय के अनुसार 16 जनवरी 2020 को भारत सरकार, त्रिपुरा सरकार और मिजोरम सरकार के अलावा ब्रू के प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू समझौता हुआ था. इस समझौते में विस्थापित 6959 ब्रू परिवारों को त्रिपुरा के विभिन्न स्थानों पर बसाया जाना था. सरूता ने कहा कि पुनर्स्थापन की प्रक्रिया की समय सीमा 28 फरवरी 2023 तक बढ़ा दिया गया है.

वहीं त्रिपुरा सरकार का हवाले से सरूता ने कहा कि 15 दिसंबर 2022 तक घरों के निर्माण के बाद कुल 2583 परिवारों को बसा दिया गया है. 16 जनवरी 2020 के अनुबंध के अनुसार पुनर्स्थापित परिवारों को 4 लाख नकद सहायता, 30*40 माप का भूखंड, 1.50 लाख रूपये घर बनाने के लिए, 2 साल के लिए 5 हजार मासिक नकद सहायता, दो साल के लिए मुफ्त राशन और इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा दिये जाने वाले अन्य सुविधाएं शामिल है.

सरुता ने त्रिपुरा सरकार का हवाला देते हुए कहा कि त्रिपुरा सरकार ने 2020-21 में 140 करोड़ दी गई राशि में से 135 करोड़ रूपये खर्च की, वहीं 2021-22 में 130 करोड़ रू. में से 110 करोड़ खर्च की गई. इसके अलावा 2022-23 में 62 करोड़ प्राप्त राशि में से पूरी राशि खर्च की गई. अब तक कुल राशि 332 करोड़ खर्च की गई है, जिसमें से 308 करोड़ खर्च की गई है.

त्रिपुरा के चार जिलों में बसाये गए हैं

अब तक चार जिलों में बारह पुनर्स्थापन जगह बनाए गए हैं, वो जगह है – ढलाई जिले में (बोंगाफापारा, हडुकलौपारा और उल्टाचेर्रा), उतरी त्रिपुरा में (कास्कौपारा, वेनबुकचेरा-रानीपारा, भंडारिमा-पुष्पोरमपारा, हंसपारा, गचीरामपारा और आशापारा), गोमती जिले में (पश्चिम कालाझारी और सिलाचारा), दक्षिण जिले में (काला लोलांग) आदि है.

केंद्रीय राज्य मंत्री सरूता ने मुलभूत सुविधाओं पर राज्य सरकार के हवाले से बताया कि ब्रू संगठनों ने स्थयी बसने वाले स्थानों का चुनाव किया है. जिसके बाद कई अधिकारियों ने उन स्थानों का दौरा किया है. सभी स्थानों पर मुलभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही है. चाहे वह सड़क, संपर्क, पेयजल स्त्रोतो का निर्माण, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र आदि का निर्माण किया जा रहा है. इसके अलावा रोजगार के लिए मनरेगा जॉब कार्ड और कौशल विकास केंद्र भी स्थापित भी किए जा रहे हैं.

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