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वर्ली पेंटिंग : वर्ली पेंटिंग क्या है और इसकी शुरूआत किसने की?

Posted on September 28, 2022 - 6:32 am by

वर्ली पेंटिंग महाराष्ट्र की सबसे खूबसूरत लोक कला है, जिसे पारंपरिक तौर पर वर्ली आदिवासी महिलाओं ने शुरूआत की थी। इसका प्रयोग वर्ली आदिवासी महिलाएं शादी – विवाह और विशेष मौकों पर घरों की दिवारों में बनाते है, यह घर को विशेष आकर्षक बनाता है। लेकिन कुछ वर्षों इसका प्रयोग विभिन्न जगहों पर किया जाता है। पेंटिंग में सामाजिक जीवन से जुड़ी क्रियाओं को दर्शाते है। मनुष्य की जानवरों के साथ चित्र और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को लयबद्ध रूप में बनाया जाता है। इन चित्रकलाओं में मनुष्य काम करते हुए जैसे शिकार, नृत्य, खेती करते हुए दिखाए जाते है। वर्ली चित्रकला को मिट्टी की दिवारों पर सफेद मिट्टी से बनाया जाता है। सफेद रंग के लिए चावल पीसकर भी प्रयोग किया जाता है।

कौन है वर्ली आदिवासी?

वर्ली आदिवासी समुदाय है, जो महाराष्ट्र – गुजरात सीमा और आसपास के पहाड़ी तथा तटीय क्षेत्रों में रहते है. वर्ली आदिवासियों की अपनी आत्मवादी मान्यताएं, रीति रिवाज और परंपराएं हैं। वर्ली आदिवासियों की अपनी भाषा है, जिसे वर्ली ही कहा जाता है। हालांकि इस भाषा कि अपनी कोई लिपि नही है। वर्ली आदिवासी अपनी सुंदर और अनूठी शैली की पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध है, जो मानव समुदायों और प्रकृति के बीच घनिष्ट संबंधों को दर्शाता है।

वर्ली पेंटिंग में मॉडर्न ट्रेंड

वर्ली कलाकार सीधी लाइन का प्रयोग बहुत ही कम करते थे। लाइन के बजाये वह बिंदू का प्रयोग होता था। लेकिन अब मॉडर्न समय में कलाकारों ने सीधी लाईन बनाना शुरू कर दिया है। कई लोगों ने पारंपरिक थीम के अलावा मॉडर्न चीजें जैसे साईकिल, कार, बिल्डिंग, कंप्यूटर, रेल आदि को भी बनाना शुरू कर दिया है।

अब कलाकार इस कला को कागज और कपड़ों में भी लेकर आ रहे है। कागज पर बनी वर्ली पेंटिंग काफी चर्चित हो रही है और भारत विदेशों में खुब बिक रही है। आदिवासी लोगों के लिए अभी भी यह परंपरा पुराने समय से जुड़ी है, नए आईडिया को अपनाने लगे है।

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