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कितनी फीसदी आदिवासी आरक्षण बढ़ाएगी कर्नाटक सरकार?

Posted on October 8, 2022 - 7:20 am by

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने शुक्रवार  7 अक्टूबर को संवैधानिक संशोधन की मांग करके राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कोटा बढ़ाने का फैसला किया है। यह तब है जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कुछ महीने ही बाकी है।

सरकार ने यह फैसला जस्टिस एच एन नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट के आधार पर लिया है, जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 15 से 17 फीसदी तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए 3 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करने की सिफारिश की है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद इसकी घोषणा की, जिसमें कांग्रेस और जद(एस) के नेताओं ने भाग लिया। बता दे कि बोम्मई सरकार पर आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए एससी/एसटी सांसदों का जबरदस्त दबाव था। इसके साथ ही वाल्मीकि गुरूपीठ के द्रष्टा प्रसन्नानंद स्वामी एससी/एसटी कोटा बढ़ाने के लिए भूख हड़ताल पर है। जस्टिस एच एन नागमोहन दास आयोग ने जुलाई 2020 में सरकार को अपनी सिफारिशे दी थी।

अनुसूची 9 है रास्ता

हालांकि, आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों के बाद, सरकार ने कानून और संविधान के अनुसार सिफारिशों को लागू करने के लिए न्यायमूर्ति सुभाष बी आदि की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसने बाद में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। दोनों रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद सरकार कानून और संविधान से संबंधित मामले पर निर्णय लेने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर विश्वास में लेना चाहती थी। वर्तमान में, कर्नाटक OBC 32 फीसदी, SC 15 फीसदी और ST को 3 फीसदी में कुल 50 फीसदी आरक्षण प्रदान करता है। इसलिए इसे अनुसूची 9 में लाने की बात हो रही है, क्योंकि इसमें न्यायिक छूट है। जिस तरह से तमिलनाडु ने इसे अनुसूची 9 के तहत 69 फीसदी आरक्षण बढ़ाने के लिए किया था। संविधान में संशोधन के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करने की बात हो रही है।

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