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जनजातीय कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी कौन करता है?

Posted on February 22, 2023 - 1:47 pm by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

केंद्र सरकार आदिवासियों के लिए कई तरह की योजनाएं बनाता है. उन योजनाओं के लिए धनराशि भी उपलब्ध कराता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन योजनाओं की निगरानी कौन करता है? आज हम उन्हीं विषय पर चर्चा करेंगे.

बता दें कि जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू करता है.

हाल ही में रायगंज से सांसद और महिला एवं विकास केंद्रीय राज्यमंत्री देबाश्री चौधरी ने जनजाति कार्य मंत्रालय से सवाल पूछा था कि क्या जनजातीय कल्याणकारी योजनाओं के कार्यों की निगरानी के लिए राज्यों कोई निगरानी इकाइयां स्थापित की गई है? वर्तमान में केंद्र औऱ राज्य दोनों इकाइयों के लिए निधियों,उनके आवंटन, वितरण और उपयोग की स्थिति पर सवाल उठाये थे. इसके अलावा निगरानी इकाइयों के कार्य करने की सीमा क्या रखी गई है.

इसके जवाब में केंद्रीय राज्य जनजाति कार्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने मंत्रालय ने हाल ही में योजनाओं के वास्तविक प्रबंधन से निधि निर्मुक्ति प्रक्रियाओं के लिए एंड डिजीटल प्रक्रिया की शुरुआत की है. जिससे के मजबूत कार्यांन्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों को पर्याप्त सहायता मिलेगी.

इसके अलावा नीति आयोग ने डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स शुरू किया है, जो डेटा आधारित शासन संबंधी विभिन्न मंत्रालयों का मुल्यांकन करता है. नीति आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की केंद्रीय क्षेत्रीय और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओ के कार्यान्वयन     और निगरानी से संबंधित प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के लिए मंत्रालय मे डेटा और रणनीति इकाइंयां स्थापित करने की सलाह दी है.

निधियों के आवंटन, संवितरण और उपयोग की स्थिति

वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक योजनाओं को प्रभावी रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक लागत के रूप में योजना 1-2 फीसदी तक की सीमा राशि दी गई थी. वहीं व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने देशभर में राज्य कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई की स्थापना के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 53.80 करोड़ रूपये के कुल परिव्यय के साथ संयुक्त योजनाओ के कार्यों के लिए प्रशासनिक लागत की सिफारिस की है.

वहीं मंत्रीमंडल ने निगरानी, मुल्यांकन, सर्वेक्षण और सामाजिक आकलन योजना के तहत केंद्रीय पीएमयू की स्थापना के लिए 20 करोड़ रूपये आवटंन की है. इसमे केंद्रीय पीएमयू विभिन्न योजनाओं के संबंध में डेटा उपलब्ध कराने के लिए राज्य इकाइयों के साथ समन्वय करेगा. जिसका उपयोग प्रभावी मुल्यांकन और निगरानी के लिए किया जाएगा.

वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी को ईएफसी की सिफारिस को मंजूरी दे दी है. बता दें कि मंत्रालय की सभी योजनाओं का डिजिटलीकरण किया गया है, इसलिए राज्य पीएमयू की स्थापना से विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्यों को दी जा रही निधियों की निगरानी हो सकेगी.

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