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सालखन ने सरना कोड पर किसका समर्थन मांगा?

Posted on October 7, 2022 - 10:16 am by

जमशेदपुर में कदमा स्थित आवास पर गुरूवार को पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड और बृहद झारखंड क्षेत्र में आदिवासी हितों की रक्षार्थ झामुमों, बीजेडी और टीएमसी के खिलाफ सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष को विवश है। इसके लिए सेंगेल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। अपनी मांगों को लेकर पिछले दिनों पांच प्रदेशों के एक लाख से भी अधिक सेंगेल समर्थक आदिवासियों ने सरना धर्म गुरू बंधन तिग्गा, शिक्षाविद डॉ करमा उरांव व विद्यासागर केरकेट्टा की उपस्थिति में विशाल रैली सभा का आयोजन किया था।

झामुमो ने आदिवासियों को ठगने का काम किया

पूर्व सांसद सालखन ने आगे कहा कि झारखंड और वृहद झारखंड क्षेत्र में आदिवासी समाज के अस्तित्व, पहचान और हिस्सेदारी का भयंकर खतरा चौतरफा मंडरा रहा है। कुड़मी-महतो के आदिवासी बनने का खतरा, डोमिसाइल के नाम पर झुनझुना थमाने और रोजगार नहीं पाने का खतरा है। आदिवासियों पर आने वाले सभी खतरों के लिए झामुमो दोषी है, क्योंकि झामुमो सुप्रीमों गुरूजी शिबू सोरेन के नेतृत्व में अब तक चार दसकों से आदिवासियों का सर्वाधिक वोट लेकर आदिवासियों को ठगने का काम किया है। वोट के लालच में झामुमो ने आठ फरवरी 2018 को हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो के सभी सांसद और विधायकों के हस्ताक्षर सहित कुड़मी को एसटी बनाने का पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को देकर आदिवासियों के लिए फांसी का फंदा बनाने का काम किया।

सरना कोड को मान्यता, तो भाजपा को समर्थन

सालखन मुर्मू ने कहा है कि अगर सरना कोड की मान्यता पर सकारात्मक संकेत देने को तैयार है, तो सेंगेल भी खुलकर भाजपा का साथ देगी, अन्यथा सेंगेल सरना धर्म कोड मान्यता को लेकर 30 नवंबर को पांच प्रदेशों में रेल रोड चक्का जाम को विवश होगा। बता दे सालखन पूर्व में मयुरभंज लोकसभा से भाजपा की सीट पर सांसद रह चुके है।  

7 सितंबर को लिखे पत्र में सालखन ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है और कहा है कि यह आदिवासियों के मान सम्मान, इतिहास और पहचान दिलाने वाला महान कार्य है तथा सदियों में एक बार होने वाला कार्य बताया है। सालखन ने 26 अगस्त को राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतंत्र और संविधान लागु करके अनिवार्य सुधार पर बात हुई थी। वहीं कोलकाता में 30 सितंबर को सरना धर्म कोड को लेकर जनसभा की गई थी जिसमें पांच राज्यों के लोग शामिल हुए थे।

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