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विधानसभा चुनाव से पहले नागालैंड में बंद क्यों और किसने बुलाया?

Posted on January 13, 2023 - 4:50 pm by

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

नागा राजनीतिक समस्या समाधान को लेकर नागालैंड पीपल्स एक्शन कमेटी(NPAC) ने 14 जनवरी को बंद बुलायी है. यह बंद छह घंटे के लिए रहेगी. ये बंद नागालैंड में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की जा रही है.

यह नागालैंड राज्य स्तरीय बंद 6 बजे सुबह से रहेगी. संयोग से इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा को लेकर 60 सदस्यीय भारतीय चुनाव आयोग टींम नागालैंड के दौरे पर है. पिछले साल जून 2022 में नागा राजनीतिक समस्या (NPI) की समाधान के लिए नागालैंड पीपल्स एक्शन कमेटी का गठन किया गया था.

क्या है नागा राजनीतिक समस्या

नागालैंड में लंबे समय से चले आ रहे नागा राजनीतिक मुद्दा जिसमें शांति और विकास के लिए जल्द समाधान की मांग को लेकर नागालैंड में विरोध प्रदर्शन चल रहा है. जिसके समाधान को लेकर हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था.

नागा समस्या को समझने के लिए चलिए इसके ऐतिहासिक पृष्टभूमि को समझते हैं. वर्ष 1881 में नागा हिल्स ब्रिटिश भारत का हिस्सा वन गई. 1918 में नागा क्लब का गठन हुआ. 1929 में नागा क्लब ने साइमन कमीशन को अस्वीकर कर दिया. नागा क्लब को 1946 में नागा नेशनल काउंसिल में मिला दिया गया.

स्वतंत्रता के समय असम के राज्यपाल सर अकबर हैदरी ने NNC के नागा आंदोलनकारियों के फिज़ो जैसे नेताओं को बिना विश्वास में लिए नौ सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसलिए फिज़ो में इसे सिरे खारिज कर दिया. अंगामी जापू फिज़ो के नेतृत्व में 14 अगस्त 1947 में एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया गया. विद्रोह को कुचलने के लिए भारत सरकार ने 1958 में सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम (अफस्पा) लागू किया गया.

16 दिसंबर 1960 में समझौते के बाद 1 दिसंबर 1963 को नागालैंड का निर्माण हुआ. यह समझौता NNC के साथ न होकर पीपल्स कन्वेंशन के साथ हुआ था. जो कि अगस्त 1957 में एक उदारवादी चरण के दौरान नागाओं का नेतृत्व कर रहा था.

सन 1964 में नागा नेशनल काउंसिल(NNC) के साथ संचालन के निलंबन पर एक समझौते के लिए एक शांति मिशन का गठन किया गया था. लेकिन इसे 1967 में छोड़ दिया गया. सरकार ने 1975 में शिलांग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत NNC और NFG के समुह ने हथियार छोड़न पर सहमति जतायी. हालांकि एक गुट समझौते को स्वीकार करने से मना कर दिया.

साल 2018 में नागा चरमपंथी समूहों के साथ केंद्र सरकार ने शांति वार्ता की थी. लेकिन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम के द्वारा अलग नागा ध्वज और नागा संविधान की मांग के कारण अनसुलझा रह गया.

बता दें कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत के एकमात्र राज्य जम्मू-कश्मीर अलग संविधान व झंडा को खारिज दिया गया और जम्मू कश्मीर को राज्य की श्रेणी से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया.

क्या है नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम(NSCN(IM)) की मांग

नागा राजनीतिक समस्या समाधान में NSCN की मांग है कि ग्रेटर नागालिम में सभी बसे हुए नागाओं को शामिल किया जाए, जिसमें पूर्वोत्तर के असम, अरूणाचल प्रदेश और मनिपुर के कुछ क्षेत्र शामिल है. इसके अलावा मयांमार के 1,20,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को शामिल किया गया है.

वर्तमान में इसी समस्या के समाधान के लिए नागालैंड पीपल्स एक्शन कमेटी ने 14 जनवरी को बंद बुलायी है.

कौन हैं नागा जनजाति समूह

नागा एक पहाड़ी जनजाति समुदाय है, जिसकी आबादी लगभग 25 लाख है. जिसमें नागालैंड के 18 लाख, मनिपुर के 6 लाख और अरूणाचल प्रदेश में 1 लाख आबादी है. इसके अलावा असम और म्यांमार के नागा शामिल है. नागा जनजाति में 19 प्रमुख उप जनजातियां है जैसे एओस, अंगामिस, चांग्स, चकेसांग, कचारिस, कुकिस आदि शामिल है.

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