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रायपुर के रैली में आदिवासियों ने क्यों कहा सरकार तय करे कि वह आदिवासी हितैषी है या..?

Posted on October 2, 2022 - 5:20 pm by

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गांधी व शास्त्री जयंती के अवसर पर आदिवासियों के कई संगठनों ने दोपहर दो बजे रैली निकाली।
रायपुर पहुंचे आदिवासियों ने एक पर्चा जारी कर दावा किया कि अबुझमाड़ क्षेत्र में आदिवासियों को जबरन विस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने बेरहबेड़ा, कचेपाल, मोंहदी, गरपा और कई जगहों पर पुलिस कैंप के लिए सैंकड़ों एकड़ जमीन ले ली है। इस जमीन पर पेड़ों की कटाई भी कर दी गई है। यह सब पेसा का उल्लघंन करते हुए बिना ग्रामसभा की अनुमति के किया गया है।


पर्चे के अनुसार अबुझमाड़ इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कई गांवों में असमय मौतें हो रही है। अबुझमाड़ इलाके में मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के बाद बावजूद अबुझमाड़ के क्षेत्र में बिना ग्राम सभा के जमीन ली जा रही है। इसके अलावा वहां पर बिना ग्राम सभा से सहमति लिए खनन का काम भी हो रहा है।


रैली में बीस से अधिक आदिवासी संगठन शामिल हुए


2 अक्टूबर को हुए इस रैली में छत्तीसगढ़ के 20 से ज्यादा आदिवासी संगठन शामिल हुए। दोपहर को 2 बजे सभी आदिवासी गोंडवाना भवन पर पहुंचे और इस रैली में बस्तर के अलावा सरगुजा और छत्तीसगढ़ के कई और जिलों से भी लोग शामिल हुए। इस रैली में छत्तीसगढ़ बचाओं आंदोलन, सर्व आदिवासी समाज, हसदेव अरण्य बचाओं आंदोलन और कई अन्य संगठन शामिल हुए।

इस रैली में हसदेव में जबरदस्ती पेड़ कटाई और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को परेशान करने का मामला भी उठाया गया।
रैली में आदिवासियों ने सरकार को आदिवासी विरोधी बताते हुए, राहुल गांधी के वादे के बाद भी राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा हसदेव अरण्य में पेड़ों कटाई पर कहा कि कांग्रेस सरकार तय करे कि वह आदिवासी हितैषी है या अडानी हितैषी।

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