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जानिये किस राज्य में पढ़ाया जा रहा है आदिवासी दर्शन?

Posted on October 6, 2022 - 10:45 am by

नेहा बेदिया

आदिवासियत विश्व के सर्वश्रेष्ठ सोच, विचार एवं मूल्यों से लैस, आदिवासी जीवन-दर्शण, चिंतन व आदिवासी विचारधारा का वाहक है। यह बात ग्लैडसन डुंगडुंग ने स्नातक परीक्षा की कॉपी जांच करने के दौरान फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा है। साथ ही जानकारी साझा किया है कि दक्षिण भारत के एक कॉलेज में आदिवासी दर्शन में ‘आदिवासिडम’ यानी ‘आदिवासियत’ की नई विषय जोड़ी गई है। जिसकी पढ़ाई शुरू हो चुकी है साथ ही प्रथम सेमेस्टर का परीक्षा भी हो गया है। हालांकि उत्तर भारत में पहले से ही आदिवासी दर्शन पर पढ़ाई होती रही है।

आदिवासी दर्शन में आदिवासियत पर पुछे गए सवाल..

उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि ‘आदिवासियत’ विश्व के सर्वश्रेष्ठ सोच, विचार एवं मूल्यों से लैस है, जिसे मरंग गोमके, जयपाल सिंह मुंडा ने ‘आदिवासियत’ एवं डॉ. रामदयाल मुंडा ने ‘आदि-दर्शन’ का नाम दिया है, जो 21वीं सदी में वैश्विक चर्चा का हिस्सा भी बन चुका है।

आगे उन्होंने आदिवासियत का मतलब व महत्व बताते हुए कहा कि जिस प्रकार मार्क्सवाद, गांधीवाद, अम्बेडकरवाद, माओवाद एवं ब्राह्मणवाद खास विचारधारा है,  उसी प्रकार ‘आदिवासियत’ आदिवासी जीवन-दर्शण, चिंतन व आदिवासी विचारधारा का वाहक है। आदिवासियत हमें भेदभाव रहित प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, सामुदायिकता, समानता, स्वायत्तता, स्वावलंबन, आपसी सहयोग, आत्म-सम्मान, अर्थव्यवस्था सर्वसम्मति आदि पर आधारित स्वशासन, समुदाय व प्रकृति केंद्रित विकास, समयानुकूल परिवर्तन एवं आहार श्रृंखला का पालन करते हुए जीवित प्राणियों के हकों का सम्मान करना सिखाता है।

आदिवासी दर्शन में आदिवासियत विषय को जोड़े जाने पर ग्लैडसन डुंगडुंग ने हर्ष जताते हुए कहा कि अब उन्हें उस दिन का इंतजार रहेगा। जब आदिवासियों को असभ्य, जंगली, बर्बर, असुर, वनवासी, नीच, जाहिल और न जाने क्या-क्या कहने वाले लोग अपने कॉलेजों में ‘आदिवासियत’ विषय को पढ़ाएंगे और उन्हें पढ़ाना ही होगा क्योंकि इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।

उनके इस फेसबुक पोस्ट में एक ने कॉमेंट कर बताया कि झारखंड के कोल्हान युनिवर्सिटी के दर्शन-शास्त्र विभाग में भी यू.जी और पी.जी के नई सिलेबस में आदिवासी दर्शन को शामिल किया गया है।

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