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आदिवासी नेता किरोड़ी लाल मीणा क्यों हैं विपक्ष के भी चहेते?

Posted on November 3, 2022 - 5:47 pm by

विजय उराँव, ट्राइबल खबर के लिए

राजस्थान की राजनीति में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा एक और नाम है जो हमेशा सुर्खियों में रहता है. बीजेपी के बाहर 10 साल बिताने वाले किरोड़ी लाल मीणा, जिन्हें ‘डॉक्टर साहब’ और ‘बाबा’ जैसे उपनामों से भी पुकारा जाता है.

किरोड़ी लाल मीणा का जन्म राजस्थान के महवा (दौसा) तहसील में खोररा मुल्ला में 3 नवंबर 1951 को हुआ था. पिता का नाम मनोहरलाल मीणा और माता का नाम फूला देवी है. पेशे से एक राजनेता व चिकित्सक हैं. वे डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद राजनीति में आये थे. इनकी पत्नी का नाम गोलमा देवी है.

कांग्रेस-बीजेपी हर किसी के चहेते रहे बाबा

राष्ट्रपति चुनावों से पहले एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के जयपुर आगमन पर अपने कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में जाने नहीं देने पर अपने पार्टी नेताओं के खिलाफ धावा बोल दिया. मालूम हो कि किरोड़ीलाल मीणा अपने राजनीतिक सफर में कई बार विधायक रहे और तीन बार सांसद रह चुके हैं.

71 वर्षीय किरोड़ी लाल मीणा आदिवासी मीणा समुदाय से संबंध रखते हैं. किरोड़ी लाल ने एमबीबीएस की है. 1985 में पहली बार दौसा जिले के महवा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर जीतकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद 1989 में, उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता. वहीं 2003-2008 के बीच वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे. इसके बाद राजे के साथ उनके मतभेदों के कारण उन्हें 2008 में पार्टी छोड़नी पड़ी थी.

वहीं किरोड़ी के राजनीतिक रसूख को देखते हुए 2008-13 की तत्कालीन गहलोत सरकार में एक मंत्री के रूप में उनकी पत्नी गोलमा देवी को जगह दी गई. जो निर्दलीय विधायक के रूप में 2008 के विधानसभा चुनाव जीतकर आई थी. 2009 के लोकसभा चुनाव में  किरोड़ी लाल ने दौसा से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर बीजेपी और कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की थी. वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले, किरोड़ी लाल पी ए संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल हो गए थे और राजस्थान में एक नय़े पार्टी को 4 सीटें दिलवाने में कामयाब रहे.

2018 में बीजेपी में लौटे किरोड़ी बाबा

2013 से 2018 की शुरुआत तक किरोड़ी लाल राजे सरकार के मुखर आलोचक रहे. बाबा समुदाय से संबंधित मुद्दों पर आवाज उठाते रहे. बाब ने कांग्रेस और बीजेपी को एक विकल्प प्रदान करने के लिए राजस्थान में तीसरा मोर्चा बनाने की भी बात कही. लेकिन मार्च 2018 में, आश्चर्यजनक तरीके से वह राजे के साथ मंच पर उपस्थित होकर बीजेपी में लौट आए. इसके बाद पार्टी ने फौरन किरोड़ी लाल को राज्यसभा सांसद बना दिया.

आदिवासियों के जननेता रहे हैं किरोड़ी बाबा

राजस्थान के अर्जुन महर बताते हैं कि किरोड़ी बाबा आदिवासियों के बड़े जननेता रहे हैं. वे आदिवासियों के लिए हमेशा खड़े रहे हैं. हर विपत्ति में आदिवासियों के साथ इस उम्र के पड़ाव में भी देते रहे हैं. उन्होंने मीणा हाईकोर्ट का निर्माण करवाया था. मीणा आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री पद से त्यागपत्र भी दिया था. इसके अलावा किरोड़ी बाबा बहुत बड़े प्रकृति प्रेमी रहे हैं. उन्होंने करीब 5 लाख पेड़ लगवाये थे. जो वर्तमान में हरे भरे रूप में है.

आदिवासी,  हिंदुत्व मुद्दों पर मुखर रहे

मीणा के 2018 में बीजेपी में वापसी करने के बाद चुनावों मे बीजेपी ने पूर्वी राजस्थान में बेहद खराब प्रदर्शन किया. जिसमें गुर्जर आबादी का भी एक महत्वपूर्ण रोल है जो कांग्रेस नेता सचिन पायलट का वोट बैंक माना जाता है और वह 2018 चुनावों के दौरान पीसीसी प्रमुख थे. किरोड़ीलाल मीणा बीजेपी की हिंदुत्व विचारधारा और आदिवासियों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं. जहां उनका मानना है कि आदिवासी हिंदू दायरे में ही आते हैं.

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