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केरल के ‘एन ओरू’ आदिवासी गांव में क्यों आ रहे हैं देशभर के लोग

Posted on February 2, 2023 - 1:59 pm by

नेहा बेदिया, ट्राइबल खबर के लिए

प्राकृतिक सौंदर्य और आदिवासी दृष्टिकोण से लैस यह गांव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. केरल के वायनाड जिले के पूकोड में एक पहाड़ी पर मौजूद इस गांव को एन ओरू ट्राइबल हेरिटेज विलेज यानी आदिवसी विरासत गांव कहा गया है.

एन ओरू केरल राज्य के आदिवासी समुदायों की जीवंत संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित करता है.

इस आदिवासी विरासत गांव में पारंपारिक तरीके से आकर्षक झोपड़ियों का एक समूह को देखा जा सकता है, जो घास से ढका हुआ है. 25 एकड़ में बसाया गया यह केंद्र वहां के आदिवासियों की विरासत और जीवन शैली के बारे में जानने और समझने का सुनहरा अवसर देता है. इस गांव के निर्माण का उद्देश्य आदिवासियों द्वारा प्रबंधित और उनकी आजीविका के विकल्पों को बढ़ावा देना है. यही वजह है कि यह गांव कैफेटेरिया की मेजबानी करता है जो आदिवासी खान-पान परोसने के साथ एक आदिवासी बाजार प्रदान करता है.

यह गांव पूरी तरह से आदिवासियों के प्रतिभा का प्रदर्शन और आजीविका के लिए समर्पित है. गांव में आदिवासी कारीगरों के स्मृति चिन्ह, मसाले, हस्तशिल्प और कई तरह की पारंपरिक चीजों को बेचने वाले स्टॉल लगाए गए हैं. यहां हस्तशिल्प संग्रह के लिए एक गोदाम, एक सम्मान केंद्र और 300 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक ओपन-एयर थिएटर भी मौजूद है. इस गांव की स्थापना से आदिवासियों को अपनी उपज बेचने को एक स्थायी बाजार हो गया है.

इतना ही नहीं, यह गांव आदिवासी खाद्य प्रसंस्करण और ऑर्गेनिक खेती जैसे कई जरूरी बिंदुओं को संरक्षण के लिए प्रशिक्षण भी देता है. एन ओरू गांव को बनाए जाने की पहल वायनाड के पूर्व उपजिलाधिकारी एन प्रसांत ने की है.

एन उरु चैरिटेबल सोसाइटी के साथ उपजिलाधिकारी के पास ‘एन उरु’ हेरिटेज हैमलेट चलाने की जिम्मेदारी है. इसके अलावा, विथिरी और पोझुथाना पंचायतों के 13 आदिवासी नेता एन ओरू सोसाइटी के सदस्य हैं.

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