Skip to main content

झारखंड-ओडिशा में क्यों लागू नहीं है पेसा कानून

Posted on January 23, 2023 - 3:01 pm by

झारखंड में पंचायतों के प्रावधान(अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996(पेसा) राज्य के नियम नहीं होने के कारण अब तक लागू नहीं है. पेसा नियम को पिछले कई सालों से आदिवासियों के द्वारा लगातार मांग होती रही है. लेकिन अभी तक नियम बनाने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पायी है. झारखंड के अलावा ओडिशा दूसरा राज्य है, जहां पेसा का नियम नहीं बन पाया है. पंचायती राज्य मंत्रालय की निरंतर प्रेरित करने के बाद 10 दस अनुसूचित राज्यों में से इस समय आठ राज्यों, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना ने अपने-अपने राज्य पंचायती राज अधिनियमों/नियमों के तहत राज्य पेसा नियम बना लिये हैं.

पेसा नियमावली के लिए परामर्श

झारखंड और ओडिशा में विभागीय परामर्श अभी चल रहा है. नौ सितंबर 2022 को केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने सभी अनुसूचित राज्यों के प्रमुख सचिवों/पंचायती राज विभाग सचिवों को पत्र भेजकर आग्रह किया था कि वे नई दिल्ली में 18 नवंबर 2021 को आयोजित पेसा पर राष्ट्र स्तरीय सम्मेल में सभी अनुसूचित राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली चर्चाओं के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण सुझावों/विचारों/विषयों पर कार्यवाई रिपोर्ट साझा करें.

पेसा से आदिवासियों को क्या फाएदा

राज्य के अंदर परंपरागत व्यवस्था को बल मिलेगा, पेसा कानून से राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए यह कानून काफी मददगार शाबित होगा. दरअसल अनुसूचित क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची द्वारा पहचाने गए क्षेत्र हैं. यह अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए विशेष अधिकार देता है. पंचायतों से संबंधित संविधान के भाग नौ के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिए एक अधिनियम है.

मध्यप्रदेश में पेसा

नवंबर 2022 में शिवराज सरकार के द्वारा मध्यप्रदेश में पेसा कानून लागू किया गया था. पेसा लागू करने वाला यह सातवां राज्य है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र ने पेसा के अपने कानून बनाएं है. मध्यप्रदेश के 89 प्रखंडों के गांवों में लागू किया गया है जो कि आदिवासी बहुल है.

क्या है पेसा कानून

आदिवासियों के लिए बने कानून की रीढ़ माने जाने वाले पेसा एक्ट के तहत आदिवासियों की पारंपरिक प्रणाली को मान्यता दी गई है. केंद्र ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र के लिए विस्तार) (पेसा) अधिनियम 1996 कानून लागू किया. मध्यप्रदेश के बड़े आदिवासी नेता और झाबुआ के सांसद रहे दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में समिति बनी थी. उसकी अनुशंसा पर ही यह मॉडल कानून बना था। यह बात अलग है कि 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून देश में लागू हुआ था.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.