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केरल: क्यों गैर-आदिवासियों के स्वैच्छिक पुनर्वास योजना पर उठा विवाद

Posted on October 28, 2022 - 1:49 pm by

केरल में इड्डुकी जिले के  मंकुलम गांव के गैर-आदिवासी कॉलोनियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि इसे लागू कर वन-सीमांत क्षेत्रों के सभी निवासियों को बेदखल की जाएगी. और उस क्षेत्रों को प्राकृतिक वन में बदलने की योजना है.

क्या है विवाद

केरल रिबिल्ड इनिशिएटिव 2019 में राज्य सरकार द्वारा घोषित एक परियोजना थी. जो जंगली जानवरों के हमलों और भूस्खलन के खतरों का सामना कर रहे लोगों को जंगल से स्थानांतरित करने के लिए थी.

दरअसल पिछले हफ्ते रिबिल्ड केरल इनिशिएटिव के तहत वन विभाग के अधिकारियों के लिए एक ट्रेनिंग कार्यक्रम किया गया था. यह कार्यक्रम इडुक्की में आयोजित किया गया था. जो स्वैच्छिक स्थानांतरण परियोजना को लागू करने के संबंध में था. इसमें मंकुलम और मुन्नार वन प्रभागों के अधिकारी के साथ मंकुलम और चिन्नाक्कनल पंचायतों के जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे. आरोप लग रहा है कि इसे लागू कर वन-सीमांत क्षेत्रों के सभी निवासियों को बेदखल की जाएगी. और उस क्षेत्रों को प्राकृतिक वन में बदलने की योजना है.

इस पर मंकुलम प्रखंड मंडल के सदस्य प्रवीण जोस ने आरोप लगाया कि वन विभाग परियोजना के तहत मंकुलम पंचायत को वनभूमि बनाने की योजना बनाई जा रही है. जोस को डर है कि परिवारों को गांव से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जाएगा. गांव में कुल जनसंख्या 2,350 परिवारों से संबंधित 8,780 लोगों के होने का अनुमान है. स्थायी निवासियों की संख्या 6,000 से कम है. कुल आबादी में से 22 फीसदी आबादी ही आदिवासी हैं.

इच्छुक लोगों को ही परियोजना में शामिल किया जाएगा

आरकेआई कार्यान्वयन समिति राज्य स्तरीय उप संरक्षक सबी वर्गीज का कहना है कि सिर्फ जो लोग स्थानांतरित करने के इच्छुक थे, उन्हें परियोजना में शामिल किया जाएगा. योजना के अनुसार  टाइटल डीड के साथ 2 हेक्टेयर तक की जमीन के मालिक को 15 लाख रुपये मिलेंगे. 18 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित व्यस्क को  15 लाख मिलेंगे. इसके साथ ही परिवार के प्रत्येक विकलांग सदस्य को अतिरिक्त 15 लाख मिलेंगे. चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो. वर्गीज ने आगे कहा कि परियोजना मुख्य रूप से उन लोगों के लिए लक्षित है. जो वन सीमावर्ती क्षेत्रों में छोटे जोत के साथ रहते हैं.

अधिकारियों के अनुसार  राज्य सरकार पहले ही राज्य में परियोजना के लिए 800 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है. एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में राज्य भर में 200 परिवार परियोजना में शामिल हो गए हैं. तथा जंगल के किनारे से स्थानांतरित हो गए हैं. राज्य सरकार पहले ही आरकेआई परियोजना के तहत 40 करोड़ वितरित कर चुकी है. अधिकांश लोग विशेष परियोजना से अनजान हैं.

जबरन बेदखली नहीं की जाएगी

वन अधिकारियों के अनुसार  मंकुलम एक जंगल से आच्छादित पंचायत है और अधिकांश सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव-पशु संघर्ष का गंभीर खतरा है. सथानीय अधिकारी जी. जयचंद्रन के अनुसार परियोजना के तहत एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. यह उन लोगों की मदद करने के लिए एक विशेष परियोजना है. जो जंगली जानवरों के खतरे का सामना कर रहे हैं. मंकुलम को वनभूमि बनाने की कोई पहल नहीं है. पंचायत के उपाध्यक्ष बिबिन जोसेफ के अनुसार बैठक में विभाग द्वारा इस बात पर सहमति हुई है कि किसी को भी उनकी जमीन से जबरन बेदखल नहीं की जाएगी.

(चित्र का प्रयोग मात्र प्रतिकात्मक है)

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