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आदिवासी क्यों कर रहे हैं एक साल से केबल पुल और बीएसएफ कैंप का विरोध

Posted on December 13, 2022 - 2:05 pm by

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दीवारघाट आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है. ये आंदोलन आज भी जारी है. आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर सिलगेर से लेकर असम तक आदिवासी जनप्रतिनिधि और ग्रामीण कवरघाट में जाम हुए और अपने कवर को लेकर आंदोलन और तेज करने की बात कही.

7 दिसंबर को आंदोलन की शुरूआत हुई थी

दोषमुक्त सर्किट में दावों ने कोटरी नदी में पुल और बी से कैम्प के विरोध में 7 दिसंबर 2021 को आंदोलन की शुरुआत हुई थी. लेकिन अब तक प्रशासन ने उन्हें सुध नहीं ली है, यही कारण है कि आज एक साल बाद भी ग्रामीण आंदोलन चल रहे हैं. आदिवासियों का कहना है कि सरकारें विकास के नाम पर पहले पुल बनवाती हैं और उसके बाद खनिज संपदा को लूटने का काम करती है.

विकास के नाम पर दैव्य निवास नहीं लुटने देंगे

आदिवसियों ने विकास के नाम पर अपने जल, जंगल जमीन को सरकार को सौंपने से इनकार कर दिया है. कहने का स्पष्ट कहना है कि इन नदी-पहाड़ों में उनके देवी-देवताओं का निवास है, वे इसे किसी भी कीमत पर किसी को लूटने नहीं देंगे.

सरकार हमारी सुविधा के लिए पुल नहीं बना रही है

आदिवासियों का कहना है कि सालों से ये लोग जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक खनिजों की संपत्ति की रक्षा करते रहे हैं. सरकार छत में पुल हमारी सुविधा के लिए नहीं बना रही है, बल्कि उनका मकसद इसका टैप करना है. स्थानीय आदिवासियों ने शिकायत की कि निर्मित गतिविधियों में तेजी से कार्य जीवन में हस्‍तक्षेप कर इसे अस्त-व्‍यस्‍त कर दिया है. उन्हें डर है कि उनके क्षेत्रों में पुलिस की गतिविधियों में वृद्धि से अत्याचार और हत्याओं के मामले भी कई गुना बढ़ जाएंगे. पुलिस मुखबिर के रूप में माओवादी अक्सर उन्हें लक्षित करते हैं.

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