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लोकसभा चुनाव में क्या धनगर वोटों को आदिवासी आरक्षण के तर्ज पर भुना पाएंगी राजनीतिक पार्टियां

Posted on March 22, 2024 - 12:35 pm by
Will political parties be able to capitalize on Dhangar votes in Lok Sabha elections on the lines of tribal reservation

लोकसभा चुनाव को लेकर लगभग सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. ऐसे में महाराष्ट्र के धनगर समुदाय का वोट बैंक किस पार्टी को जायेगा ये देखने में काफी यह देखना काफी दिलचस्प होगा. ऐसा इसलिए भी क्योंकि एक तरफ धनगर समुदाय को आदिवासियों की सूची में शामिल करने की मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है.

आदिवासी के रूप में वर्गीकृत और अधिसूचित करने की लंबे समय से लंबित मांग अभी भी अधूरी ही है. महाराष्ट्र की आबादी का 8-10 प्रतिशत में धनगर समुदाय आता है. जिसमे कम से कम चार से पांच लोकसभा सीटें हैं.

बता दें कि परंपरागत रूप से, धनगर चरवाहे हैं जो काफी हद तक अलग-थलग जीवन जीते हैं, मुख्य रूप से जंगल, पहाड़ियों और पहाड़ों में घूमते हैं. धनगर समुदाय भाजपा के “मा-धा-वा” (या माधव फॉर्मूला) का भी प्रमुख हिस्सा है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की पारंपरिक मराठा-दलित-मुस्लिम वोट-बैंक राजनीति के विकल्प के रूप में भी देखा जाता है.

हालांकि, धनगर समुदाय को खानाबदोश जनजाति (सी) श्रेणी के तहत शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण मिलता है, जो कि 3.5 प्रतिशत है, मांग कर रहे हैं कि उन्हें अनुसूचित जनजाति के तहत रखा जाए, जिसे 7 प्रतिशत आरक्षण मिलता है. धनगर नेताओं का दावा है कि ‘धंगर’ और ‘धंगड़’ एक ही हैं और एक “स्थलाकृतिक त्रुटि” के कारण वे महाराष्ट्र में कुछ अन्य राज्यों की तरह एसटी श्रेणी के तहत लाभ पाने से वंचित हो गए हैं.

हालांकि पिछली बार हुई धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि धनगर आरक्षण को लेकर सरकार सकारात्मक है. सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती. धनगर समाज को आरक्षण दिलाने में हमारी भूमिका है जो न्यायालय में भी डट सकता है.

मध्य प्रदेश, बिहार और तेलंगाना राज्यों में सरकारी निर्णय लेकर कुछ समुदायों को जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया है. उन राज्यों की प्रक्रियाओं का अभ्यास करने के लिए धनगर समुदाय के एक प्रतिनिधि के साथ एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा. अब देखना यह है कि क्या धनगर समुदाय का वोट वर्तमान की सरकार के तरफ ही जायेगा या फिर किसी अन्य पार्टी को अपना समर्थन देगी. वैसे राजनितिक पार्टियां आदिवासी वोटों को अपनी तरफ करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

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