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चिंताजनक: नामांकित आदिवासी बच्चों में आधे बीच में क्यों छोड़ देते हैं पढ़ाई

Posted on December 2, 2022 - 5:03 pm by

आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में नामांकित कुल बच्चों में से लगभग आधे कक्षा 8 को पूरा करने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं. जनजातीय विकास रिपोर्ट-2022 में पाया गया कि करीब 48.2 प्रतिशत बच्चे आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई से पहले स्कूल जाना बंद कर देते हैं. इसमें लड़कों द्वारा अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़े जाने की संख्या अधिक बताई गई है.

दरअसल यह रिपोर्ट 29 नवंबर को भारत ग्रामीण आजीविका फाउंडेशन (बीआरएलएफ) द्वारा जारी की गई थी. इसे 2013 में ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) के तहत केंद्र द्वारा स्थापि एक स्वतंत्र निकाय है. जनजातीय विकास रिपोर्ट एक स्वतंत्र निकाय है, जिसे केंद्र द्वारा स्थापित किया गया है. यह आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों जैसे झारखंड, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, गुजरात, मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश पर अधिक ध्यान देती है. 

कक्षा दस तक ही पहुंच पाते हैं आदिवासी

इन क्षेत्रों में कार्रवाई करने के लिए तैयार किए गए इस निकाय ने यह भी पाया कि कक्षा 10 या माध्यमिक स्तर तक पहुंचने वालों की संख्या, 62.4 प्रतिशत की संचयी ड्रॉपआउट दर के साथ कम है. वास्तव में कक्षा 1 में दाखिला लेने वाले एसटी बच्चों में से कुल मिलाकर 40 प्रतिशत ही कक्षा 10 तक पहुंचते हैं. स्कूल के विभिन्न चरणों में देखी जाती है कि वे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं.

ड्रॉपआउट का यह दर विशेष रूप से देश के छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों में मापा गया है. जिसमें प्रारंभिक कक्षाओं में यह दर अन्य समुदायों की तुलना में बहुत अधिक है. आदिवासी समुदायों के विकास पर नज़र रखने वाले रिपोर्ट ने दावा किया जा रहा है कि इस तरह के पहले दस्तावेज़ के रूप में सामने आया है.

आदिवासी क्षेत्रों में वर्तमान की बात करें तो स्कूल छोड़ने की दर 31.3 प्रतिशत (31.9 प्रतिशत लड़के, 30.7 प्रतिशत लड़कियां) है. जिसमें लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या अधिक है. इसमें कहा गया है कि प्रारंभिक कक्षाओं यानी कक्षा 1-8 में 48.2 प्रतिशत बच्चों (49.8 प्रतिशत लड़के, 46.4 प्रतिशत लड़कियां) के स्कूल छोड़ने की दर एक चिंताजनक प्रवृत्ति रही है.

वहीं माध्यमिक शिक्षा में प्रवेश करने वालों में कक्षा 10 के अंत में, 63.2 प्रतिशत छात्र और 61.4 प्रतिशत छात्राएं बाहर हो गईं. राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) के शैक्षिक शोधकर्ता और शिक्षक प्रबंधन के सेवानिवृत्त प्रोफेसर विमला रामचंद्रन ने इस रिपोर्ट में शिक्षा की स्थिति पर पेपर लिखा है. उन्होंने कहा कि एसटी की स्थिति सबसे चुनौतीपूर्ण होने के साथ एसटी, एससी और सभी समुदायों के बीच एक ध्यान देने योग्य अंतर भी है.

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